Mission Punjab 2027: पंजाब फतह की तैयारी में जुटे अमित शाह, ‘नशा मुक्त पंजाब’ के जरिए AAP को घेरने की बड़ी योजना
चंडीगढ़/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य राज्यों के चुनावी शोर के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अब पंजाब पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया है। अगले साल (फरवरी 2027) होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अब हर महीने पंजाब का दौरा करेंगे और राज्य में ‘नशा मुक्त पंजाब’ के नारे के साथ एक व्यापक जनजागरूकता यात्रा शुरू करेंगे।
भाजपा का ‘अकेला चलो’ का संकल्प
मोगा में हुई ‘बदलाव रैली’ के बाद से ही भाजपा ने यह साफ कर दिया है कि वह पंजाब में गठबंधन के बजाय अकेले चुनाव लड़ेगी। गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कहा है कि भाजपा अब किसी ‘छोटे भाई’ (अकाली दल के संदर्भ में) की भूमिका में नहीं, बल्कि अपने दम पर सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगी। पार्टी का मानना है कि पंजाब के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस की गुटबाजी, अकाली दल के आंतरिक मतभेद और आम आदमी पार्टी (AAP) के कथित ‘वादा-खिलाफी’ से एक राजनीतिक रिक्तता (Political Vacuum) बनी है, जिसे भाजपा भरने को तैयार है।
ड्रग्स: भाजपा के कैंपेन का केंद्र बिंदु
भाजपा ने पंजाब के ‘ड्रग्स’ (नशे) की समस्या को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाने का फैसला किया है।
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जनजागरूकता यात्रा: मई से शुरू होने वाली इन यात्राओं में पार्टी के केंद्रीय और राज्य स्तरीय नेता शामिल होंगे।
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एक्सपोज़ रणनीति: पार्टी नेताओं का कहना है कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार नशे पर नकेल कसने में पूरी तरह विफल रही है। यात्रा के माध्यम से जनता को यह बताया जाएगा कि कैसे नशे ने पंजाब के युवाओं और परिवारों को बर्बाद कर दिया है।
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डबल इंजन का वादा: भाजपा जनता के बीच यह संदेश लेकर जाएगी कि पंजाब की सीमाएं संवेदनशील हैं और यहां केवल ‘डबल इंजन’ की सरकार ही ड्रग्स तस्करी पर लगाम लगा सकती है।
क्या पंजाब में बदलेगी सियासी जमीन?
पंजाब की राजनीति, जहाँ अक्सर धर्म, जाति और क्षेत्रीय समीकरण हावी रहते हैं, वहां भाजपा का यह दांव काफी साहसी माना जा रहा है।
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क्यों है भाजपा को उम्मीद? भाजपा का आकलन है कि पंजाब के जमीनी हालात बदल रहे हैं। AAP सरकार के प्रति उपजी कथित नाराजगी और अन्य प्रमुख दलों की कमजोर स्थिति भाजपा के लिए ‘उपजाऊ जमीन’ तैयार कर रही है।
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बॉर्डर सुरक्षा का मुद्दा: एक सीमावर्ती राज्य होने के नाते, भाजपा का ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ और ‘नशा मुक्ति’ का कार्ड पंजाब के मतदाताओं के बीच कितनी पैठ बना पाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।