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RBI New Rules: रुपये की मजबूती के लिए RBI सख्त, जुलाई से लागू होंगे नए नियम; विदेशी बाजारों पर रहेगी पैनी नजर

रुपये की मजबूती और विदेशी बाजारों में उसकी सही कीमत सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है. अब ऑफशोर यानी विदेशों में होने वाले रुपये से जुड़े डेरिवेटिव सौदों पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी. जुलाई 2027 से लागू होने वाले इन नए नियमों के तहत बैंकों को हर महत्वपूर्ण ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट देनी होगी. यह कदम न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगा, बल्कि करेंसी मार्केट में जोखिम को समझने और नियंत्रित करने में भी मदद करेगा.

रुपये की ग्लोबल ट्रेडिंग पर पकड़ मजबूत करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक अहम नियामकीय बदलाव की घोषणा की है. केंद्रीय बैंक ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपनी ग्रुप कंपनियों द्वारा किए गए ऑफशोर रुपये-आधारित डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की विस्तृत रिपोर्टिंग करें. यह व्यवस्था जुलाई 2027 से चरणबद्ध तरीके से लागू होगी और 2028 तक पूरी तरह प्रभावी हो जाएगी. अब तक RBI की निगरानी मुख्य रूप से घरेलू बाजारों तक सीमित थी, लेकिन नए नियमों के तहत विदेशी बाजारों खासकर नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) जैसे सेगमेंट में होने वाले सौदों को भी ट्रैक किया जाएगा. इससे रुपये की वास्तविक कीमत तय करने में पारदर्शिता आएगी और विदेशी बाजारों के प्रभाव को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा.

आरबीआई के नए नियम

RBI के मुताबिक, इस कदम का मुख्य उद्देश्य फॉरेक्स मार्केट में डेटा की गुणवत्ता बढ़ाना और मूल्य निर्धारण को अधिक सटीक बनाना है. इसके लिए बैंकों को कॉन्ट्रैक्ट की नॉशनल वैल्यू, मैच्योरिटी, काउंटरपार्टी और करेंसी स्ट्रक्चर जैसी अहम जानकारियां साझा करनी होंगी. इससे यह समझना आसान होगा कि रुपये से जुड़ा जोखिम कहां उत्पन्न हो रहा है और किस तरह ट्रांसफर हो रहा है. बैंकों की ओर से उठाई गई ऑपरेशनल चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए RBI ने कुछ राहत भी दी है. उदाहरण के तौर पर 1 मिलियन डॉलर से कम के नॉशनल वैल्यू वाले कॉन्ट्रैक्ट्स को रिपोर्टिंग से छूट दी गई है. इसके अलावा बैक-टू-बैक ट्रांजैक्शंस को भी इस दायरे से बाहर रखा गया है.

रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी केवल भारतीय इकाइयों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ऑफशोर से जुड़ी पार्टियों को भी सीधे डेटा देने की अनुमति दी गई है. इससे विदेशी शाखाओं और सहयोगी संस्थाओं के डेटा को भी कवर किया जा सकेगा. एक्सपर्ट का मानना है कि यह कदम घरेलू और ऑफशोर करेंसी मार्केट के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है. अभी तक रुपये की कीमत का एक बड़ा हिस्सा भारत के बाहर तय होता रहा है, जिससे नीतिगत हस्तक्षेप सीमित हो जाता था. RBI ने स्पष्ट किया है कि जुलाई 2027 तक कुल FX डेरिवेटिव ट्रांजैक्शन का 70% डेटा, जनवरी 2028 तक 80% और जुलाई 2028 तक 100% डेटा रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा.