Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर किरेन रिजिजू का विपक्ष पर तीखा पलटवार रामपुरहाट टीएमसी दफ्तर में फंदे से लटके मिले पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी: सुसाइड नोट में मानसिक ... 'बिहार बन रहा पेपर लीक की राजधानी': तेजस्वी यादव का NDA सरकार पर तीखा हमला, 19 अगस्त को राजभवन मार्च... पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने, छिड़ा सियासी घमासान बरेली: सरकारी नौकरी का झांसा देकर रचाई शादी, विरोध पर बेल्ट से पीटा और छीने जेवर; पति समेत ससुराल वा... सुखबीर बादल पर हमले की NIA जांच की मांग: हरसिमरत कौर बादल ने गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र, बड़ी ... भिवंडी: दरगाह में इलाज के नाम पर महिला से अघोरी रस्में व प्रताड़ना; UP भागने की फिराक में था मौलवी, ... दिल्ली में पूरा हुआ 100 'अटल कैंटीन' का संकल्प: DU मेट्रो स्टेशन से 25 नई कैंटीन शुरू, मात्र ₹5 में ... रीवा में स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही: 2 घंटे तक नहीं पहुंची 108 एंबुलेंस, सांस लेने में तकलीफ से जूझ... खान-खनिज संशोधन बिल के खिलाफ रांची में राजद-वाम दलों का साझा मोर्चा: आर्थिक नाकेबंदी और दिल्ली घेराव...

कई इलाकों में बिजली गिरने से 14 की मौत

बांग्लादेश में मौसमी तूफानों के कहर से तबाही का मंजर

राष्ट्रीय खबर

ढाकाः बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में आए भीषण मौसमी तूफानों और गरज के साथ हुई भारी बारिश के दौरान बिजली गिरने की घटनाओं में कम से कम 14 लोगों की जान चली गई है। सोमवार को सरकारी अधिकारियों ने इस दुखद आंकड़े की पुष्टि करते हुए बताया कि देश के कई जिले इन अचानक आए तूफानों की चपेट में हैं।

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, मरने वालों में अधिकांश वे किसान थे जो खुले खेतों में काम कर रहे थे, या वे मजदूर थे जो काम के दौरान असुरक्षित स्थानों पर मौजूद थे। अचानक आए इन तूफानों ने भारी बारिश और तीव्र गर्जना के साथ तबाही मचाई, जिससे कई अन्य लोग भी घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।

बांग्लादेश में बिजली गिरना एक बड़ी समस्या रही है, जहाँ हर साल सैकड़ों लोग अपनी जान गंवाते हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, बांग्लादेश सरकार ने साल 2016 में बिजली गिरने को प्राकृतिक आपदा घोषित किया था। यह निर्णय उस वर्ष मई के महीने में हुई भीषण जनहानि के बाद लिया गया था, जब केवल एक महीने में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जिसमें एक ही दिन में 82 लोगों के मारे जाने का भयावह रिकॉर्ड भी शामिल था।

विशेषज्ञों का मानना है कि जानलेवा बिजली गिरने की घटनाओं में वृद्धि का एक प्रमुख कारण वनों की कटाई है। जंगलों के कटने से ऊंचे पेड़ों की संख्या काफी कम हो गई है, जो पहले बिजली को अपनी ओर खींचकर लोगों के लिए सुरक्षा कवच का काम करते थे।

मौसमी चक्र के अनुसार, मानसून पूर्व के महीने (अप्रैल से जून) बांग्लादेश के लिए विशेष रूप से खतरनाक होते हैं। इस दौरान बढ़ते तापमान और नमी के कारण वायुमंडल में अत्यधिक अस्थिरता पैदा होती है, जो तीव्र गर्जना वाले बादलों और बिजली गिरने की घटनाओं के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाती है। अधिकारियों ने नागरिकों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।