मामले को संभालने चाड में सेना ने संभाला मोर्चा
एजेंसियां
ना जामेनाः पूर्वी चाड के वाडी फिरा प्रांत में पानी के अधिकार को लेकर दो परिवारों के बीच शुरू हुआ विवाद एक बड़े सांप्रदायिक संघर्ष में बदल गया, जिसमें कम से कम 42 लोगों की जान चली गई है। उप प्रधानमंत्री लिमाने महामत ने सोमवार को सूडान सीमा के निकट स्थित इगोटे गांव का दौरा करने के बाद इस भीषण नरसंहार की पुष्टि की।
अधिकारियों के अनुसार, यह हिंसा शनिवार को एक मामूली विवाद से शुरू हुई थी, जिसने जल्द ही प्रतिशोधात्मक हमलों का रूप ले लिया और आसपास के बड़े इलाके में फैल गई। उप प्रधानमंत्री महामत ने बताया कि इस खूनी संघर्ष में 10 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए प्रांतीय स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।
बढ़ती हिंसा को देखते हुए सेना को हस्तक्षेप करना पड़ा। सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई के बाद स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है। सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए गांव में पारंपरिक मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू की है और दोषियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया भी आरंभ कर दी गई है।
चाड में जमीन और पानी जैसे सीमित प्राकृतिक संसाधनों को लेकर किसानों और चरवाहों के बीच हिंसक झड़पें होना आम बात है। पिछले साल भी दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में इसी तरह के संघर्षों में दर्जनों लोग मारे गए थे। हालांकि, वर्तमान स्थिति पड़ोसी देश सूडान में जारी गृहयुद्ध के कारण और अधिक जटिल हो गई है।
सूडान से भागकर आए लाखों शरणार्थियों ने चाड के पूर्वी प्रांतों में शरण ली है, जिससे स्थानीय संसाधनों पर भारी दबाव पड़ा है। सुरक्षा चिंताओं और संघर्ष के प्रसार को देखते हुए चाड ने फरवरी में सूडान के साथ अपनी सीमा को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया था। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, सूडान के युद्ध ने दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट पैदा कर दिया है, जिससे न केवल अकाल की स्थिति उत्पन्न हुई है, बल्कि चाड जैसे पड़ोसी देशों की स्थिरता भी खतरे में पड़ गई है।