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Haryana Assembly Special Session: हरियाणा विधानसभा में भारी हंगामा, कांग्रेस ने किया सत्र का बॉयकॉट, बाहर चलाया समानांतर सदन

चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार ने हरियाणा क्लेरिकल सर्विस बिल 2026 और नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संसद में गिर जाने पर निंदा प्रस्ताव के लिए विधानसभा का एक दिन का स्पेशल सत्र बुलाया लेकिन कांग्रेस ने इसका बहिष्कार कर दिया है. सदन के बाहर कांग्रेस की ओर से समानांतर विधानसभा भी चलाई गई.

जरनैल सिंह पहुंचे, बाकी 4 गायब : हरियाणा विधानसभा सचिवालय में कांग्रेस के निलंबित विधायक जरनैल सिंह भी पहुंचे. जरनैल सिंह कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं थे. कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग मामले में जरनैल सिंह को पार्टी की सदस्यता से निलंबित कर रखा है. इसी के चलते उन्हें विधायक दल की बैठक में शामिल ही नहीं किया गया. कांग्रेस के बाकी चार विधायक रेणु बाला,शैली चौधरी, मोहम्मद इलियास और मोहम्मद इसराइल आज विधानसभा नहीं पहुंचे.

कांग्रेस ने सत्र का बॉयकॉट किया : वहीं कांग्रेस ने आज सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले बैठक की जिसमें आज की सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं होने का फैसला लिया गया. नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि आज सुबह बीएसी की बैठक हुई. हमने निंदा प्रस्ताव की कॉपी मांगी लेकिन कॉपी नहीं दी गई, इसलिए हमने फैसला किया कि हम सत्र का बॉयकॉट करेंगे. हम सदन के बाहर अपना सत्र चलाएंगे जिसमें सभी विधायक अपने विचार रखेंगे. हुड्डा ने कहा कि सदन किसी पार्टी के राजनीति करने का स्थान नहीं है, सदन जनता के मुद्दे पर चर्चा करने का स्थान है. ऐसे में कांग्रेस इस विशेष सत्र का बहिष्कार कर रही है. विधानसभा सत्र में प्रदेश के लोगों का पैसा खर्च होता है लेकिन सत्ता पक्ष लोगों के पैसे का दुरुपयोग कर रहे हैं. हम लोगों के पैसे का दुरुपयोग नहीं करेंगे और हम टीए डीए नहीं लेंगे. जब यह महिला आरक्षण बिल 2023 में पास कर दिया गया था तो उसे लागू क्यों नहीं किया गया. सरकार विधानसभा सत्र के जरिए पार्टी का प्रचार करना चाहती है.

सीएम ने शोक प्रस्ताव पढ़ा : इधर हरियाणा विधानसभा में सबसे पहले राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम् के साथ विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई. इसके बाद सीएम नायब सैनी ने शोक प्रस्ताव पढ़ना शुरू किया. जरनैल सिंह को छोड़कर सदन के अंदर कांग्रेस का एक भी विधायक मौजूद नहीं था. सीएम ने शोक प्रस्ताव के जरिए पूर्व डिप्टी स्पीकर गोपीचंद गहलोत औऱ पूर्व सांसद जंगबीर सिंह के निधन पर शोक जताया. इसके साथ ही सीएम ने शहीद हुए जवानों की शहादत का उल्लेख करते हुए शोक व्यक्त किया. शोक प्रस्ताव के बाद सदन में मौन रखा गया.

“विपक्ष सदन से भाग जाता है” : सदन में कांग्रेस विधायकों की गैरमौजूदगी पर बोलते हुए कैबिनेट मंत्री कृष्णलाल पंवार ने कहा कि सदन में जब भी सरकार हरियाणा की बात करती है, विपक्ष सदन से भाग जाता है. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण बिल का विरोध किया. विपक्ष इसको लेकर गंभीर नहीं है.

सीएम ने सदन में निंदा प्रस्ताव रखा : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन में निंदा प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि कोई भी समाज तब तक पूर्ण रूप से विकसित नहीं माना जा सकता जब तक महिलाओं को समान अवसर और अधिकार न मिले. हमारे गौरवशाली इतिहास में भी महिलाओं के अनेक प्रेरणादायक उदाहरण है. हमारी बेटियों ने खेलों में पूरी दुनिया में बार-बार अपनी उपलब्धियों के झंडे गाड़ने का काम किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के पानीपत से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा दिया जिसके बाद आज देश में लिंगानुपात में बड़ा सुधार हुआ है. पिछले साढ़े 11 वर्षों में हरियाणा में लिंगानुपात 871 से बढ़कर 923 हो गया है. महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और सशक्त करने के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं. लखपति दीदी और ड्रोन दीदी जैसी योजनाओं से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत किया गया है. महिला सुरक्षा के लिए प्रदेश में 33 महिला थाने खोले गए हैं. 16 और 17 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन में संशोधन विधेयक लाया गया जिसके तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलना था. इस शुभ शुरुआत से पहले ही विपक्षी दलों ने विरोध कर काला तिलक लगाया.

“विपक्ष का चेहरा उजागर”: उन्होंने आगे कहा कि “महिलाओं के विरुद्ध विपक्ष का चेहरा उजागर हुआ है. लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत का अधिकार मिलना था, वहीं विधानसभा में भी महिलाओं को 33% का अधिकार मिलना था. महिलाओं के समर्थन में आज का विशेष सत्र बुलाया गया लेकिन विपक्ष आज भी वॉकआउट कर गया. जिस प्रकार का रवैया केंद्र में विपक्ष के बड़े नेताओं का है, वैसा ही रवैया हरियाणा कांग्रेस ने भी दिखाया. विपक्ष के लिए निंदा प्रस्ताव भी लाना चाहिए. ये कोई राजनीतिक प्रस्ताव नहीं बल्कि महिलाओं के प्रति हम सब की प्रतिबद्धता का प्रतीक है. मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित करने की भी अपील की.

“बिल का विरोध नहीं करना चाहिए था” : सदन में मौजूद कांग्रेस के निलंबित विधायक जनरैल सिंह ने कहा कि समझ नहीं आ रहा है कि विपक्ष क्यों महिला आरक्षण बिल का विरोध कर रहा है. वे बाहर सत्र चलने से अच्छा अंदर आ कर अपनी बात करते. इस बिल का विरोध नहीं होना चाहिए था. सर्वसम्मति से पास होना चाहिए था. मां बहनों को हम इसको लेकर क्या जवाब देंगे. मैं अपने नेताओं को सुझाव दूंगा इस बिल का समर्थन करें.

कांग्रेस ने समानांतर सत्र चलाया : वहीं सदन से बाहर कांग्रेस का विधानसभा परिसर में समानांतर सत्र चल रहा था जिसमें कांग्रेस के नेताओं ने अपनी बात रखी. कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक रघुवीर कादियान ने इसमें स्पीकर की भूमिका निभाई. कांग्रेस विधायकों ने सदन के बाहर शोक प्रस्ताव पढ़ने के बाद दो मिनट का मौन भी रखा. इस दौरान कांग्रेस विधायक भारत भूषण बत्रा ने कहा कि बिल का गिर जाना सरकार की एक बड़ी हार है. सरकार इसको स्वीकार करें. किसी भी बिल को पारित करवाने से पहले सभी की सहमति जरूरी होती है. लेकिन बीजेपी ने बलपूर्वक बिल को पास करवाना चाहा. इस बिल का नाकाम होना पहले से तय था. बीजेपी को इसका पता था कि उनके पास बहुमत नहीं है. दो तिहाई बहुमत के लिए सरकार के पास सदस्य नहीं थे. बीजेपी ने संसदीय परंपराओं का मजाक बना दिया. लेकिन इंडिया गठबंधन ने एकजुट होकर भाजपा को रोक दिया.

सरकार को हाईकमान से निर्देश : उन्होंने आगे कहा कि सरकार को हाई कमान से निर्देश मिल रहे हैं. इससे पहले वंदे मातरम् ,चुनाव सुधार और मनरेगा के ऊपर भी संकल्प प्रस्ताव पास किए गए, जबकि ये मसले केंद्र सरकार के अधीन आते हैं. हमने विरोध किया, हमारी बात नहीं मानी. आज हरियाणा में लोकल बॉडी के चुनाव हो रहे हैं. ऐसे में विशेष सत्र बुलाने की क्या जरूरत थी. अगले महीने सत्र बुलाया जा सकता था. कांग्रेस ने आज का फैसला सोच समझकर किया है. किसी भी असंवैधानिक काम का समर्थन नहीं करेंगे. बीजेपी भ्रम फैलाने के लिए प्रस्ताव विधानसभा में लेकर आई है. हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं.

“प्रमोशन बिल के खिलाफ नहीं” : वहीं भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि इस बिल का महिला आरक्षण से कोई वास्ता नहीं है. जिस स्वरुप में बिल पारित हो चुका है, उसी में लागू किया जाए. बीजेपी की नीयत ठीक नहीं है. बिना जनगणना के सरकार संशोधन क्यों लेकर आई. जब बिल 2023 में पास हो गया है, उसे लागू करें. भाजपा महिलाओं को आरक्षण नहीं देना चाहती. महिलाओं का सम्मान कांग्रेस ने किया. देश की पहली महिला मुख्यमंत्री, महिला स्पीकर, पहली महिला अध्यक्ष, राष्ट्रपति कांग्रेस की देन है. कांग्रेस ग्रुप डी के प्रमोशन बिल के खिलाफ नहीं है. सरकार कौशल रोजगार निगम के जरिए लगे 1 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को नियमित करने का बिल भी लाए, हम समर्थन करेंगे.

“असंवैधानिक बात नहीं होनी चाहिए” : कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा ने कहा कि बीजेपी जो निंदा प्रस्ताव ला रही है, वो उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है. ये पूरी तरीके से असंवैधानिक है. इसके विरोध में कांग्रेस ने सदन का बहिष्कार किया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सदन लोकतंत्र का मंदिर है. सबका फर्ज बनता है कि अपनी बात रखनी चाहिए, लेकिन असंवैधानिक बात नहीं करनी चाहिए. ये हरियाणा का नहीं, बल्कि केंद्र सरकार का विषय है. भाजपा महिला विरोधी है. बीजेपी की नीयत ठीक नहीं है.