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जलवायु परिवर्तन के प्रारंभिक दौर को झेल रहा उत्तर भारत

तपती भट्टी का असर देश के कई हिस्सों में

  • भीषण विस्तार और तापमान का स्तर

  • सौ में से 95 गर्म शहर भारत में हैं

  • स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी जारी की गयी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः वास्तविक समय की वैश्विक तापमान रैंकिंग के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, भारत इस समय वैश्विक ताप लहर के एक खतरनाक केंद्र के रूप में उभरा है। कई वेबसाइटों द्वारा 24 अप्रैल को शाम 5:00 बजे संकलित किए गए वैश्विक डेटा के मुताबिक, दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों की सूची में से 95 शहर अकेले भारत के हैं। यह आंकड़ा न केवल जलवायु परिवर्तन की भयावहता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भारतीय उपमहाद्वीप का एक विशाल हिस्सा इस समय हीट चैंबर में तब्दील हो चुका है।

गर्मी का यह प्रकोप अब केवल राजस्थान या उत्तर-पश्चिम भारत तक सीमित नहीं है। मध्य भारत से लेकर भारत-गंगा के मैदानी इलाकों तक, दर्जनों शहरों में पारा 40 डिग्री से की दहलीज को काफी पीछे छोड़ चुका है। ओडिशा, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के कई केंद्रों में तापमान 44 डिग्री से से 45 डिग्री से के करीब दर्ज किया जा रहा है। इस सूची की सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसमें केवल दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े महानगर ही नहीं, बल्कि छोटे कस्बे और ग्रामीण क्षेत्र भी शामिल हैं, जो इस लू की व्यापकता और गहराई को प्रमाणित करते हैं। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों के कई छोटे जिले वैश्विक तापमान चार्ट में शीर्ष पर बने हुए हैं।

मौसम वैज्ञानिकों ने इस थर्मल सर्ज के लिए कई भौगोलिक और वायुमंडलीय कारकों को जिम्मेदार ठहराया है। उत्तर-पश्चिम से आने वाली निरंतर शुष्क और गर्म हवाओं ने नमी को खत्म कर दिया है। बादलों की अनुपस्थिति के कारण सूर्य की किरणें सीधे धरातल को तपा रही हैं। इस वर्ष प्री-मानसून गतिविधियों और छिटपुट वर्षा के अभाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। आमतौर पर होने वाली हल्की बारिश जो तापमान को नियंत्रित करती थी, वह इस बार नदारद है। दिन का उच्च तापमान तो घातक है ही, लेकिन रात के समय भी पारा उम्मीद के मुताबिक नहीं गिर रहा है। इससे मानव शरीर को गर्मी से उबरने का समय नहीं मिल पा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कंक्रीट के बढ़ते जंगलों के कारण शहरी हीट आइलैंड प्रभाव पैदा हो रहा है, जहां शहर अपने आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में बहुत अधिक गर्म हो रहे हैं। घटता हरित आवरण और प्राकृतिक जल निकायों का सूखना इस आग में घी का काम कर रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने निरंतर चेतावनी जारी की है कि लंबे समय तक ऐसी गर्मी के संपर्क में रहने से हीट स्ट्रोक और निर्जलीकरण का खतरा बढ़ जाता है, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और खुले में काम करने वाले मजदूरों के लिए। हालांकि, पूर्वी भारत में कुछ छिटपुट गरज के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद है, लेकिन जब तक मानसून का ठोस आगमन नहीं होता, तब तक भारत के इस हॉटबॉक्स बने रहने की संभावना प्रबल है। यह स्थिति वैश्विक स्तर पर बढ़ते बेसलाइन तापमान और जलवायु संकट की एक गंभीर चेतावनी है।