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भारतीय सेना के लिए नया ध्रुवास्त्र तैयार

  • नाग इंटी टैंक मिसाइल श्रेणी का

  • यह पूर्व का उन्नत संस्करण है

  • कश्मीर और लद्दाख के लिए कारगर

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय सेना के बेड़े में अत्याधुनिक तकनीक से निर्मित ध्रुवास्त्र मिसाइल शामिल होने जा रही है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित यह मिसाइल नाग एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का एक उन्नत हवाई संस्करण है। इसे विशेष रूप से हेलीकॉप्टर से लॉन्च करने के लिए बनाया गया है, जो कश्मीर और लद्दाख जैसे ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में भारतीय वायुसेना और थल सेना की सुरक्षा क्षमता को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगा।

ध्रुवास्त्र की परिकल्पना 1980 के दशक में भारत के मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत की गई थी। यह नाग मिसाइल परिवार का हिस्सा है। जहाँ नाग के कुछ संस्करण जमीन से दागे जाते हैं, वहीं ध्रुवास्त्र इसका एरियल संस्करण है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी तीसरी पीढ़ी का फायर एंड फॉरगेट सिस्टम है, जो एक बार लक्ष्य पर लॉक होने के बाद उसे स्वायत्त रूप से ट्रैक कर नष्ट कर देता है।

यह मिसाइल खराब मौसम और रात के अंधेरे में भी दुश्मन के टैंकों की गर्मी को पहचान कर उन्हें सटीक निशाना बना सकती है। लॉन्च के बाद यह मिसाइल पहले ऊंचाई पर जाता है और फिर ऊपर से सीधे हमले को अंजाम देता है। 7 किलोमीटर की रेंज वाली इस मिसाइल का वजन 43 किलोग्राम है और यह 800 मिमी मोटी स्टील प्लेट को भेदने की शक्ति रखती है।

इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित प्रचंड और रुद्र जैसे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों से दागा जा सकता है। सरकार ने हाल ही में 156 प्रचंड हेलीकॉप्टरों का ऑर्डर दिया है और सितंबर 2023 में लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से 200 से अधिक ध्रুवास्त्र मिसाइल खरीदने की मंजूरी दी है। इस मिसाइल की अनुमानित लागत 1 करोड़ रुपये से भी कम है, जो इसे वैश्विक स्तर पर किफायती बनाती है।