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असम के डिब्रूगढ़ में अचानक की गोलीबारी से राजनीतिक तनाव बढ़ा

तिनसुकिया से उल्फा (आई) के सात आतंकवादी गिरफ्तार

  • मणिपुर में कई बंकरों को ध्वस्त किया गया

  • कई अभियानों में ड्रग्स और हथियार जब्त किये

  • भारत बांग्लादेश सीमा रिश्वत केस में चार्जशीट

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : असम के डिब्रूगढ़ जिले के चौलखोवा इलाके में शनिवार को हुई फायरिंग की एक सनसनीखेज घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अज्ञात हमलावरों ने आबिद अहमद नामक व्यक्ति पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिससे उनकी बाईं आंख सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। पीड़ित को तुरंत असम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी है।

यद्यपि आधिकारिक तौर पर इसे एक आपराधिक कृत्य माना जा रहा है, लेकिन स्थानीय निवासियों का दावा है कि इस हमले के पीछे हालिया चुनावों से उपजा तनाव और गहरी राजनीतिक दुश्मनी है। ग्रामीणों का आरोप है कि मतदान की प्राथमिकताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रति झुकाव को लेकर पिछले कुछ महीनों से इलाके में विवाद चल रहा था, जो अब हिंसक रूप ले चुका है। पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी असंतोष जताया है, उनका कहना है कि पिछली शिकायतों और बढ़ते खतरों के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं की गई। एडिशनल एसपी (क्राइम) अतुल कुमार ने बताया कि जांच शुरुआती चरण में है और बयानों के आधार पर जल्द कार्रवाई की जाएगी।

इसी दौरान, सुरक्षा बलों ने पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों में भी बड़ी सफलताएं हासिल की हैं। तिनसुकिया पुलिस ने अलग-अलग अभियानों में प्रतिबंधित संगठन उल्फा (स्वतंत्र) के सात संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान बार्लिन नियोग, मिट्ठू गोहेन, लिलांबर मोरन, विकास डेका, शीबा देब, परितोष देब और मनोब डे के रूप में हुई है। दूसरी ओर, मणिपुर में भी सुरक्षा बलों ने 11 और 12 अप्रैल को व्यापक तलाशी अभियान चलाकर उग्रवादियों के 21 बंकरों को नष्ट किया और भारी मात्रा में विस्फोटक व हथियार बरामद किए।

इसके अतिरिक्त, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े 60.30 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। गुवाहाटी की एक विशेष अदालत में एनपीसीसी के पूर्व अधिकारियों और निजी फर्मों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। आरोप है कि सीमा चौकियों के निर्माण के दौरान करोड़ों रुपये की रिश्वत का लेन-देन हवाला चैनलों के माध्यम से किया गया। भ्रष्टाचार और उग्रवाद के खिलाफ ये समन्वित प्रयास दिखाते हैं कि प्रशासन क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए निरंतर सक्रिय है।