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इस्लामाबाद में युद्धविराम संबंधी वार्ता बेनतीजा समाप्त

अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने ईरान को जिम्मेदार बताया

  • परमाणु मुद्दे पर बात चीत अटक गयी

  • लगातार डोनाल्ड ट्रंप से बात करते रहे

  • ईरान ने साफ कर दिया नहीं दिखायेंगे

एजेंसियां

इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित मैराथन वार्ता किसी ठोस नतीजे पर पहुंचे बिना समाप्त हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार सुबह इस्लामाबाद से रवाना होने से पहले इस विफलता का ठीकरा ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को छोड़ने से इनकार करने पर फोड़ा है। लगभग 21 घंटों तक चली इस गहन चर्चा के बाद वेंस ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन अपनी रेड लाइन्स (लक्ष्मण रेखा) को लेकर बहुत स्पष्ट था, लेकिन तेहरान की हठधर्मिता के कारण 28 फरवरी से जारी संघर्ष को समाप्त करने की उम्मीदें धुंधली पड़ गई हैं।

उपराष्ट्रपति वेंस ने बताया कि वार्ता के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कम से कम आधा दर्जन बार बातचीत की। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़ा मतभेद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। वेंस के अनुसार, हमें ईरान की ओर से एक सकारात्मक प्रतिबद्धता की आवश्यकता है कि वे न तो परमाणु हथियार बनाएंगे और न ही उन उपकरणों को हासिल करने की कोशिश करेंगे जो उन्हें जल्दी से परमाणु हथियार बनाने में सक्षम बनाते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि समझौते तक न पहुंच पाना अमेरिका से कहीं अधिक ईरान के लिए बुरी खबर है।

दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय ने वार्ता की विफलता की खबरों को ज्यादा तवज्जो न देते हुए कहा कि किसी को भी एक ही सत्र में समझौते की उम्मीद नहीं थी। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि क्षेत्रीय मित्रों और पाकिस्तान के साथ उनके संपर्क जारी रहेंगे।

हालांकि, ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने आरोप लगाया कि अमेरिका की अत्यधिक और अनुचित मांगों के कारण समझौता नहीं हो सका। वर्तमान में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच 14 दिनों का युद्धविराम लागू है, लेकिन इसके खत्म होने के बाद की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

इस युद्ध ने पिछले छह हफ्तों में भारी तबाही मचाई है। संघर्ष की शुरुआत ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों से हुई थी, जिसमें अब तक ईरान में 3,000, लेबनान में 2,020, इजरायल में 23 और खाड़ी देशों में एक दर्जन से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान ने मध्य पूर्व के कई देशों को आर्थिक और सामाजिक रूप से पीछे धकेल दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने दोनों पक्षों से युद्धविराम का पालन करने और भविष्य में संवाद जारी रखने की अपील की है, ताकि क्षेत्र को और अधिक रक्तपात से बचाया जा सके।