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मुख्य चुनाव आयुक्त और आईएएस अधिकारी के बीच तीखी नोकझोंक

चुनाव आयोग की बैठक में हाई-प्रोफाइल विवाद

राष्ट्रीय खबर

कूचबिहारः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कोलकाता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक उस समय विवादों के घेरे में आ गई, जब एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच सार्वजनिक रूप से बहस हो गई। यह घटना चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ द्वारा बुलाई गई एक महत्वपूर्ण वर्चुअल मीटिंग के दौरान हुई, जिसका उद्देश्य राज्य की सुरक्षा और चुनावी तैयारियों का जायजा लेना था।

सूत्रों के अनुसार, मामला तब बिगड़ा जब कूच बिहार के सामान्य पर्यवेक्षक के रूप में तैनात अनुराग यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कुछ टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज जताया। अनुराग यादव, जो उत्तर प्रदेश कैडर के 2000 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और वहां प्रमुख सचिव रैंक पर कार्यरत हैं, आयोग की कार्यशैली और बातचीत के लहजे से असंतुष्ट नजर आए।

चर्चा के दौरान जब गतिरोध बढ़ा, तो कथित तौर पर सीईसी ज्ञानेश कुमार ने अधिकारी को वापस घर लौट जाने का निर्देश दे दिया। इस पर अनुराग यादव ने पलटवार करते हुए कहा, आप हमारे साथ इस तरह का बर्ताव नहीं कर सकते। हमने इस सेवा को अपने जीवन के 25 साल दिए हैं। आपके बात करने का यह तरीका स्वीकार्य नहीं है। इस तीखे संवाद के बाद कुछ देर के लिए पूरी बैठक में सन्नाटा पसर गया।

इस घटना के तत्काल बाद चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए अनुराग यादव को पर्यवेक्षक के पद से हटा दिया। हालांकि, आयोग के आधिकारिक सूत्रों ने इस कार्रवाई को केवल विद्रोही रवैये से जोड़कर देखने से इनकार किया है। आयोग का तर्क है कि यादव को उनकी पेशेवर अक्षमता के कारण हटाया गया है।

बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान जब सीईसी ने उनसे उनके प्रभार वाले क्षेत्र (कूच बिहार) के मतदान केंद्रों की संख्या जैसे बुनियादी सवाल पूछे, तो वे सटीक जवाब नहीं दे पाए। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पर्यवेक्षक आयोग की आंख और कान होते हैं। यदि कोई अधिकारी जमीनी स्तर पर समय बिताने के बाद भी बुनियादी जानकारी नहीं दे पाता, तो वह उस पद के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता।

इस हंगामे के बीच बैठक में कूच बिहार के संवेदनशील मतदान केंद्रों पर भी चर्चा हुई। बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निषेधाज्ञा लागू करने का सुझाव दिया। साथ ही, राज्य सरकार ने हर जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है ताकि सभी मतदान केंद्रों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें।