ईरान में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों की असली पोल खुली
एजेंसियां
वाशिंगटनः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक सनसनीखेज स्वीकारोक्ति में इस बात की पुष्टि की है कि वाशिंगटन ने दिसंबर और जनवरी के दौरान ईरान में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और विपक्षी समूहों को हथियार मुहैया कराए थे। फॉक्स न्यूज के संवाददाता ट्रेय यिंगस्ट के साथ रविवार को एक टेलीफोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान सरकार को अस्थिर करने और उसे उखाड़ फेंकने के प्रयासों में सीधे तौर पर भूमिका निभाई थी।
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमलों (जो 28 फरवरी 2026 से जारी हैं) के बीच युद्ध अपने 38वें दिन में प्रवेश कर चुका है। ट्रंप ने इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा, हमने उन्हें बहुत सारी बंदूकें भेजीं। हमने उन्हें कुर्दों के माध्यम से भेजा था। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें लगता है कि कुर्दों ने वे हथियार अपने पास ही रख लिए और वे शायद प्रदर्शनकारियों तक उस तरह नहीं पहुंचे जैसा योजना बनाई गई थी।
ईरान में जनवरी में हुए इन प्रदर्शनों के दौरान सरकारी बलों की कार्रवाई में हजारों लोगों के मारे जाने की खबरें आई थीं। ट्रंप ने पहले इन हमलों का औचित्य यह बताया था कि वह ईरानियों को इस्लामिक गणराज्य के शासन से मुक्त करना चाहते हैं। लेकिन अब उनके इस बयान ने तेहरान के उन दावों को मजबूती दे दी है, जिनमें ईरान लगातार यह कहता रहा है कि ये प्रदर्शन स्वाभाविक नहीं थे, बल्कि विदेशी समर्थित आतंकवादियों द्वारा भड़काए गए थे।
विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के इस बयान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी और कूटनीतिक जटिलताएं बढ़ सकती हैं। जहां एक ओर मानवाधिकार समूहों ने ईरानी शासन द्वारा 45,000 से अधिक लोगों की कथित हत्या (ट्रंप के दावे के अनुसार) की निंदा की है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका द्वारा एक संप्रभु राष्ट्र में विद्रोह के लिए हथियार भेजने की बात स्वीकार करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन के दायरे में आता है। इस बीच, युद्ध में अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत और 26,000 से अधिक के घायल होने की पुष्टि हो चुकी है, जिससे मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है।