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नेपाल में माउंट एवरेस्ट पर बड़ा रेस्क्यू घोटाला

सरकार बदली तो फाइलों में दबे घोटाले बाहर आने लगे

काठमांडू: दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की गोद में बसे नेपाल से एक चौंकाने वाला भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। द काठमांडू पोस्ट की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में पर्वतारोहियों और पदयात्रियों के साथ लगभग 2 करोड़ डॉलर (करीब 20 मिलियन डॉलर) का एक बड़ा बीमा घोटाला उजागर हुआ है। इस जालसाजी में स्थानीय गाइडों और होटल कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर पर्यटकों को बीमार करने और फिर फर्जी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने की साजिश रची जा रही है।

जांच में खुलासा हुआ है कि पर्यटकों से मोटी रकम ऐंठने के लिए उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, माउंट एवरेस्ट के आधार शिविरों और आसपास के इलाकों में कुछ गाइड कथित तौर पर पर्वतारोहियों के खाने में मिलावट करते हैं, ताकि उन्हें दस्त या अन्य शारीरिक समस्याएं हों। एक बार जब पर्वतारोही बीमार महसूस करने लगता है, तो उसे डराया जाता है कि उसकी स्थिति हाइ अल्टीट्यूड सिकनेस (ऊंचाई पर होने वाली बीमारी) के कारण जानलेवा हो सकती है। इसके बाद, उन्हें तुरंत हेलीकॉप्टर से निकालने का नाटक किया जाता है, जिसका भारी-भरकम बिल बीमा कंपनियों से वसूला जाता है।

नेपाल पुलिस के केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीआईबी) ने इस मामले की गहनता से पड़ताल की है। सीआईबी की जांच में धोखाधड़ी के दो मुख्य तरीके सामने आए हैं। पहले तरीके में, थके हुए पर्वतारोहियों को गाइड खुद सलाह देते हैं कि यदि वे पैदल वापस नहीं जाना चाहते, तो वे बीमारी का बहाना करें ताकि उन्हें हेलीकॉप्टर से वापस ले जाया जा सके। दूसरे और अधिक खतरनाक तरीके में, गाइड और होटल कर्मचारी मिलकर ऊंचे क्षेत्रों में ट्रेकर्स को मौत का डर दिखाते हैं और जबरन निकासी के लिए राजी करते हैं।

यह मामला पहली बार 2018 में सुर्खियों में आया था, जिसके बाद नेपाल सरकार ने एक तथ्य-खोज समिति बनाई थी। उस समय 700 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई थी और कई सुधारों की घोषणा की गई थी। हालांकि, पिछले साल सीआईबी ने जब इस मामले को फिर से खोला, तो पाया गया कि यह धोखाधड़ी थमी नहीं है, बल्कि और अधिक संगठित तरीके से बढ़ रही है। काठमांडू, जो कि दुनिया भर के पर्वतारोहियों के लिए मुख्य प्रवेश द्वार है, अब इस घोटाले के कारण अपनी छवि बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। एवरेस्ट की चोटी नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सीमा पर स्थित है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है।