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Agriculture Crisis 2026: खाड़ी युद्ध का कृषि पर असर: खाद की किल्लत और महंगी खेती से परेशान होंगे किसान, जानें क्या है खतरा

जालंधर: खाड़ी में अमरीका-इजराईल तथा ईरान के मध्य पिछले 20-22 दिनों से चले आ रहे युद्ध को देखते हुए जहां एक तरफ गैस और तेल की कमी महसूस की जा रही है वहीं पर दूसरी ओर युद्ध लंबा खिचने की स्थिति में किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक यूरिया व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा मध्य पूर्व क्षेत्र से होकर गुजरता है।

अमरीका में आयात होने वाले उर्वरकों का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा विशेष रूप से कतर से आता है। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि पिछले कुछ समय से उर्वरकों की कीमतों में भी बढ़ौतरी होनी शुरू हो गई है। आगामी फसल के सीजन में उर्वरकों की कमी किसानों को महसूस हो सकती है। नाइट्रोजन उर्वरक मक्का उगाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिसकी खेती अमरीका में लगभग 5 लाख किसान करते हैं, जैसा कि नैशनल कॉर्न ग्रोअर्स एसोसिएशन के अनुसार बताया गया है।

दूसरी ओर बताया जाता है कि व्हाइट हाऊस दुनिया भर से उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोत खोज रहा है और इसमें काफी सफलता भी मिली है। हम उर्वरक की समस्या पर पूरी तरह काम कर रहे हैं। अमरीका का कहना है कि वह सभी व्यवधानों को पूरी तरह खत्म कर सकता है। लेकिन वह इन्हें कम जरूर कर सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धीरे-धीरे सभी सैक्टरों पर युद्ध का असर आने वाले महीनों में दिखाई देना शुरू हो जाएगा। अभी तो यही क्यास लगाए जा रहे हैं कि युद्ध के बादल जल्द ही छंट जाएंगे लेकिन अभी भी वैश्विक अनिश्चितता की स्थिति पूरी तरह से बनी हुई है।