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देश में लॉकडाउन की चर्चा अफवाह हैः हरदीप सिंह पुरी

पश्चिम एशिया संकट के बीच मोदी के बाद केंद्रीय मंत्री

  • सरकार के पास पर्याप्त भंडार है

  • वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर काम जारी

  • संसद में मोदी ने दिया है आश्वासन

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पिछले कुछ दिनों से पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच भारत में एक बार फिर देशव्यापी लॉकडाउन की अफवाहों ने जोर पकड़ लिया था। सोशल मीडिया पर प्रसारित इन भ्रामक खबरों के कारण देश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ और एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत की खबरें आने लगी थीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि सरकार के पास लॉकडाउन जैसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

अफवाहों पर लगाम और सरकार का स्पष्टीकरण

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए जनता को आश्वस्त किया। उन्होंने लिखा, भारत में लॉकडाउन की अफवाहें पूरी तरह से निराधार और झूठी हैं। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि भारत सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हम शांत, जिम्मेदार और एकजुट रहें।

मंत्री का यह बयान उस समय आया जब ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा गलियारे, विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने की आशंका जताई जा रही थी। इसी आशंका के चलते आम जनता में डर बैठ गया था कि ईंधन की भारी कमी हो सकती है, जिससे कोविड-19 जैसी पाबंदियां लौट सकती हैं।

हरदीप सिंह पुरी ने न केवल लॉकडाउन का खंडन किया, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा पर भी महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ईंधन और अन्य महत्वपूर्ण आपूर्ति की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है।

भारत की तैयारियों का जिक्र करते हुए यह जानकारी सामने आई है कि देश ने पिछले 11 वर्षों में अपनी ऊर्जा सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए 53 लाख मीट्रिक टन का रणनीतिक तेल भंडार तैयार किया है। इतना ही नहीं, भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार 65 लाख मीट्रिक टन का अतिरिक्त रणनीतिक भंडार बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। यह भंडार किसी भी वैश्विक संकट या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतों को हफ्तों तक पूरा करने में सक्षम है।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा और राज्यसभा में पश्चिम एशिया के हालातों पर चर्चा की थी। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को भरोसा दिलाया था कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

सरकार वैकल्पिक स्रोतों से कच्चा तेल और गैस प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने तेल आयात के स्रोतों का विविधीकरण किया है, जिससे किसी एक क्षेत्र में अस्थिरता होने पर देश की अर्थव्यवस्था पर कम से कम प्रभाव पड़े।