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आसिया अंद्राबी को आजीवन कारावास

एनआईए की दलीलों को अदालत ने स्वीकार किया

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्लीः दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंद्र जीत सिंह ने सजा की अवधि पर दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।

अदालत ने अंद्राबी की सहयोगियों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को भी इसी मामले में 30-30 साल की जेल की सजा सुनाई है। इन तीनों को 14 जनवरी को यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया गया था, जिनमें धारा 20 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता), धारा 38 (सदस्यता से संबंधित अपराध) और धारा 39 (आतंकवादी संगठन को समर्थन देना) शामिल हैं।

यूएपीए के आरोपों के अलावा, अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत भी दोषी ठहराया। इनमें धारा 153ए (समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 153बी (राष्ट्रीय अखंडता के प्रतिकूल प्रभाव डालना), 120बी (आपराधिक साजिश), 505 (सार्वजनिक शरारत) और 121ए (राज्य के खिलाफ साजिश) शामिल हैं।

एनआईए ने अंद्राबी के लिए आजीवन कारावास की मांग की थी। एजेंसी ने तर्क दिया था कि उन्होंने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ा था और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों के खिलाफ एक कड़ा संदेश भेजने की जरूरत है। अदालत ने सजा तय करते समय अपराधों की गंभीरता पर अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार किया।

आसिया अंद्राबी जम्मू-कश्मीर स्थित अलगाववादी संगठन दुख्तरान-ए-मिलत की प्रमुख हैं। उनके और उनके सहयोगियों के खिलाफ यह मामला अलगाववाद और आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने से जुड़ी गतिविधियों से संबंधित है। यह फैसला यूएपीए के तहत चलाए जा रहे मामलों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जहाँ अदालतें राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से संबंधित अपराधों पर कड़ा रुख अपना रही हैं।