Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
बापटला बीच पर मिला शिवलिंग पीठम और मूर्तियां; लहरों के साथ बहीं या जमीन से निकलीं? जांच में जुटा प्र... रीलबाजी की सनक पड़ी भारी: ग्वालियर में 3400 किस वाली कार का कटा चालान, मालिक से मौके पर साफ करवाए लि... वंदे मातरम् विवाद पर ओवैसी का बयान: 'संविधान की शुरुआत हम भारत के लोग से होती है', बीजेपी-कांग्रेस म... दिल्ली में ₹35 प्रति किलो बिकेगा प्याज: केंद्र सरकार ने चलाया 'कांदा एक्सप्रेस', NAFED और NCCF स्टोर... इस्लामाबाद के PIMS अस्पताल में भीषण आग: AC कंप्रेसर फटने से 15 नवजात बच्चों की जिंदा जलकर मौत, PM शह... बिना आंदोलन के भी यह काम हो सकता था मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिले विदेश मंत्री जयशंकर बलात्कार के दोषी राम रहिम को 21 दिनों का फर्लो ऑनलाइन धतूरा बेच रहे कई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई प्याज और चीनी के दाम सरकार पर अतिरिक्त बोझ

ईरान के खिलाफ युद्ध में नहीं हो रहे शामिल

प़ड़ोसी देश अमेरिकी फैसले को सही नहीं मानते

दुबईः ईरान द्वारा फारस की खाड़ी (पर्शियन गल्फ) में हमलों का दायरा बढ़ाने के बावजूद, सीधे तौर पर प्रभावित होने वाले कई खाड़ी देश ईरान के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से इनकार कर रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों में कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत जैसे देशों ने सैन्य जवाबी कार्रवाई के बजाय संयम और कूटनीति का मार्ग चुनना बेहतर समझा है।

इन खाड़ी देशों की सरकारों का स्पष्ट मानना है कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता अपने क्षेत्र की रक्षा करना और एक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष को रोकना है, जो न केवल मध्य पूर्व को अस्थिर कर सकता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों और तेल आपूर्ति को भी भारी नुकसान पहुँचा सकता है।

इस भू-राजनीतिक संकट के बीच, अमेरिकी राजनीति में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। फॉक्स न्यूज के व्हाइट हाउस वरिष्ठ संवाददाता पीटर डूसी ने जब डोनाल्ड ट्रंप से खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों के संबंध में प्रश्न किया, तो ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े विशेषज्ञों ने भी यह अनुमान नहीं लगाया था कि तेहरान अपने पड़ोसी देशों को इस तरह निशाना बनाएगा।

ट्रंप ने डूसी के सवाल का जवाब देते हुए जोर देकर कहा, किसी ने भी नहीं। किसी ने भी नहीं। बड़े से बड़े विशेषज्ञों ने भी यह नहीं सोचा था कि वे (ईरान) इन देशों पर हमला करेंगे। ट्रंप का यह बयान उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत पर ईरानी हमलों की पुष्टि की गई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों की यह तटस्थता उनकी मजबूरी और रणनीति दोनों है, क्योंकि वे ईरान के साथ सीधे युद्ध की कीमत जानते हैं। तेल और गैस के विशाल भंडार वाले ये देश जानते हैं कि युद्ध की स्थिति में उनके बुनियादी ढांचे को जो नुकसान होगा, उससे उबरने में दशकों लग सकते हैं। यही कारण है कि वे अमेरिका या अन्य पश्चिमी शक्तियों के सीधे सैन्य गठबंधन का हिस्सा बनने के बजाय संवाद के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं।