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कांग्रेस ने फिर सरकार पर तीखा तंज कसा

विदेश नीति और पीएम की चुप्पी पर बार बार सवाल

  • ईरान की घटना पर चुप्पी का प्रश्न

  • अपनी स्वायत्तता खो रहे है देश

  • किस भय से पीएम चुप्पी साधे हैं

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट और ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खामेनेई की हत्या के बाद भारत की राजनीतिक फिजां में भी गर्माहट पैदा हो गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार के रुख, विशेषकर प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री की चुप्पी को लेकर कड़े सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने सरकार की विदेश नीति को कमजोर और समझौतावादी करार देते हुए आरोप लगाया है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता खो रहा है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने रेखांकित किया कि 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के संवैधानिक प्रमुख आयतुल्लाह खामेनेई की हत्या कर दी गई, लेकिन भारत सरकार ने इस पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

रमेश ने तंज कसते हुए प्रधानमंत्री को समझौतावादी प्रधानमंत्री कहा और आरोप लगाया कि वे अपने अमेरिकी और इजरायली मित्रों को नाराज करने के डर से मौन धारण किए हुए हैं। विपक्षी दल ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि अब तक संसद में इस घटना को लेकर कोई शोक प्रस्ताव भी नहीं लाया गया है।

कांग्रेस ने सरकार के इस व्यवहार को चयनात्मक बताया है। जयराम रमेश ने याद दिलाया कि मई 2024 में जब ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हुई थी, तब भारत सरकार ने न केवल एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की थी, बल्कि संसद सत्र शुरू होने पर शोक प्रस्ताव भी रखा था। कांग्रेस का तर्क है कि अब वैसी ही सक्रियता क्यों नहीं दिखाई जा रही? उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ईरान BRICS+ का सदस्य है और इस वर्ष भारत इस महत्वपूर्ण मंच की अध्यक्षता कर रहा है, ऐसे में भारत की यह चुप्पी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत संदेश भेजती है।

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 2817 (2026) पारित किया है, जिसमें ईरान द्वारा खाड़ी देशों (बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, यूएई और जॉर्डन) पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की गई है। भारत सहित 140 देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। हालांकि, चीन और रूस ने इस मतदान से दूरी बनाए रखी। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि ईरान हर दिशा में आक्रामक हमले कर रहा है, जिससे समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय शांति खतरे में है। बहरीन जैसे देशों ने इस वैश्विक फैसले का स्वागत किया है। कांग्रेस का कहना है कि भारत को पड़ोसी देशों पर हमलों की निंदा करने का पूरा अधिकार है, लेकिन उसे ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों पर भी अपना स्पष्ट स्टैंड रखना चाहिए, ताकि संतुलन बना रहे।