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जब्त बख्तरबंद वाहन लौटाए, लेकिन कैश और सोना रोका

हंगरी ने इतने दिनों बाद यूक्रेन पर अपनी तरफ से नर्मी दिखाई

बुडापेस्टः राजधानी बुडापेस्ट से आ रही खबरों के अनुसार, हंगरी ने गुरुवार को यूक्रेन के दो जब्त किए गए बख्तरबंद बैंक वाहनों को वापस कर दिया है। हालांकि, हंगरी सरकार ने इन वाहनों में मौजूद लगभग 82 मिलियन डॉलर मूल्य की नकदी और सोने को अभी भी अपने पास रोक रखा है।

हंगरी का दावा है कि वह इस संपत्ति के स्रोत और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के आरोपों की जांच कर रहा है। दूसरी ओर, यूक्रेन की राजधानी कीव ने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे अप्रत्यक्ष चोरी करार दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच संबंध पहले से ही काफी तनावपूर्ण चल रहे हैं।

हंगरी और यूक्रेन के बीच के रिश्तों में कड़वाहट का मुख्य कारण हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन के रूस के साथ करीबी संबंध रहे हैं। पिछले हफ्ते यह तनाव तब और बढ़ गया जब हंगरी ने सात यूक्रेनी नागरिकों को भारी मात्रा में नकदी और सोना ले जाते समय हिरासत में ले लिया। कीव ने बुडापेस्ट पर आरोप लगाया कि उसने वैध तरीके से धन का हस्तांतरण कर रहे बैंक कर्मचारियों को बंधक बना लिया है। यूक्रेन का तर्क है कि हंगरी इस संपत्ति का उपयोग यूक्रेन पर दबाव बनाने के लिए कर रहा है ताकि वह निलंबित तेल शिपमेंट को फिर से शुरू कर दे।

हिरासत में लिए गए इन सात लोगों को अंततः हंगरी द्वारा निष्कासित कर दिया गया और वे शुक्रवार को यूक्रेन की सीमा में दाखिल हो गए। लेकिन जब्त की गई संपत्ति की वापसी अभी भी एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने रविवार को हंगरी की इस कार्रवाई को राज्य प्रायोजित डकैती और जबरन वसूली का एक अभूतपूर्व कृत्य बताया।

वहीं, हिरासत में लिए गए कर्मचारियों के वकील लोरेंट होर्वाथ ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि यूक्रेनी बैंक ओशदबैंक का मानना है कि यह मनी ट्रांसपोर्ट पूरी तरह से वैध था और बैंक अपनी संपत्ति की वसूली के लिए सभी कानूनी रास्तों का इस्तेमाल करेगा।

इस बीच, हंगरी की संसद ने मंगलवार को ओर्बन की फिडेज़ पार्टी द्वारा प्रस्तावित एक नया कानून पारित किया है। यह कानून कर अधिकारियों को 60 दिनों तक नकद और सोने को अपने पास रखने की अनुमति देता है, ताकि वे इसकी उत्पत्ति और गंतव्य की जांच कर सकें और यह मूल्यांकन कर सकें कि इससे हंगरी की राष्ट्रीय सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद ओर्बन के घरेलू चुनाव प्रचार का भी हिस्सा है। 12 अप्रैल को होने वाले चुनावों में ओर्बन को कड़ी चुनौती मिल रही है और उन्होंने यूक्रेन युद्ध को अपने अभियान का मुख्य केंद्र बनाया है। ओर्बन लगातार दावा कर रहे हैं कि विपक्ष हंगरी को युद्ध में घसीट सकता है, जबकि विपक्ष इन दावों को सिरे से खारिज कर चुका है। इसी विवाद के चलते ओर्बन ने मास्को पर नए यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों और यूक्रेन के लिए बड़े ऋण प्रस्तावों पर भी वीटो लगा दिया है।