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लगातार आलोचनाओँ के बाद पीएम मोदी की पहल

ईरान के राष्ट्रपति से फोन पर बात की

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से टेलीफोन पर बातचीत की और मध्य पूर्व की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। पिछले महीने ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहला सीधा संपर्क था। प्रधानमंत्री ने शांति और संवाद के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए रेखांकित किया कि हिंसा और अस्थिरता किसी के हित में नहीं है।

पीएम मोदी ने क्षेत्र में जारी तनाव, नागरिकों की जान जाने और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर दुख जताया। उन्होंने राष्ट्रपति पेज़ेशकियन से क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण भारत के ऊर्जा आयात पर पड़ रहे असर को देखते हुए, पीएम ने माल और ऊर्जा के निर्बाध पारगमन की आवश्यकता को भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने दोहराया कि भारत का हमेशा से मानना रहा है कि सभी विवादों का समाधान कूटनीति और संवाद के जरिए ही संभव है।

यह बातचीत उस समय हुई है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान (28 फरवरी को सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद) ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल और खाड़ी क्षेत्र के अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे दुबई और दोहा जैसे व्यापारिक केंद्र भी प्रभावित हुए हैं।

भारत अपनी रसोई गैस का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात करता है। वर्तमान में इस मार्ग पर यातायात ठप होने से भारत में कुकिंग गैस की किल्लत महसूस की जा रही है, जिससे रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सरकार ने स्थिति की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की है और पीएम ने जनता से पैनिक न करने की अपील की है।