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एक ही दिन में स्वाहा हुए 2 लाख करोड़ रुपये

युद्ध और तेल आपूर्ति की अव्यवस्था का असर शेयर बाजार पर

  • सभी प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज

  • विदेशी निवेशक अपना पैसा निकाल रहे हैं

  • घरेलू बाजार में तरलता का अभाव दिखा

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार का दिन बेहद निराशाजनक रहा। चौतरफा बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख सूचकांकों में भारी गिरावट दर्ज की गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 800 अंकों से अधिक लुढ़क गया, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 23,650 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बंद हुआ। इस तेज गिरावट के कारण निवेशकों की लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति मिनटों में स्वाहा हो गई।

बाजार में आए इस भूचाल के पीछे प्रमुख रूप से 6 कारक जिम्मेदार माने जा रहे हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध का गहराता संकट। ईरान और इज़राइल-अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। युद्ध की इस स्थिति ने निवेशकों के बीच डर का माहौल बनाया है, जिससे वे जोखिम वाले एसेट्स (शेयरों) से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली। विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। चीनी बाजारों में सुधार और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों के परिदृश्य को देखते हुए विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में मुनाफावसूली तेज कर दी है, जिससे बाजार में तरलता की कमी महसूस की जा रही है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल। मिडल-ईस्ट में तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल के दाम बढ़ने से व्यापार घाटा और महंगाई बढ़ने की आशंका ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है।

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड के बढ़ने से डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है। जब भी अमेरिकी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो उभरते बाजारों (जैसे भारत) से पैसा वापस अमेरिकी बाजारों की ओर जाने लगता है, जिसका असर घरेलू शेयर बाजार पर पड़ता है। कई बड़ी कंपनियों के चालू तिमाही के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे हैं।

कॉर्पोरेट आय में सुस्ती और भविष्य के कमजोर मार्गदर्शन ने निवेशकों के उत्साह को ठंडा कर दिया है, जिससे विशेष रूप से बैंकिंग और आईटी शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। आम तौर पर जब विदेशी निवेशक बेचते हैं, तो घरेलू निवेशक बाजार को सहारा देते हैं। हालांकि, गुरुवार को घरेलू फंडों की ओर से भी वैसी खरीदारी नहीं देखी गई जो बाजार के गिरते स्तर को संभाल सके।