Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
MP Weather Alert: मध्य प्रदेश में अगले 24 घंटे भारी! इन जिलों में ओले, आंधी और बारिश की चेतावनी; IMD... मध्य प्रदेश में नामी कारोबारी ने खुद को मारी गोली, सुसाइड से इलाके में फैली सनसनी; जांच में जुटी पुल... Jail Suicide : जेल में महिला कैदी ने की आत्महत्या; दहेज प्रताड़ना के आरोप में थी बंद, न्यायिक जांच क... Namo Yamuna Cruise: दिल्ली में 'नमो यमुना' क्रूज का टिकट काउंटर तैयार; 5KM का सफर और 1 घंटे की सैर, ... Cricket Scandal: महिलाओं के बाथरूम में छिपकर बनाया वीडियो; 2 क्रिकेटर गिरफ्तार, खेल जगत में मचा हड़क... Deepika Padukone Pregnancy: फिल्म 'किंग' की शूटिंग शुरू! सेट से लीक हुई फोटो में दीपिका का हाथ पकड़े... Donald Trump Attack: सिर्फ 4 सेकंड में सुरक्षा घेरा पार! ट्रंप की डिनर पार्टी में फायरिंग का खौफनाक ... Economy News: डीजल-ATF पर विंडफॉल टैक्स में बड़ी कटौती; पेट्रोल निर्यात पर नहीं लगेगी ड्यूटी, आम जनत... Buddha Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा पर पढ़ें भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान और मोक्ष की कथा; घर में आएगी ... FSSAI Weight Loss Tips: मोटापा दूर करने के लिए अपनाएं FSSAI की ये 7 अच्छी आदतें; हमेशा रहेंगे फिट और...

राहुल गांधी की सदन में उपस्थिति पर छिड़ी जंग

अमित शाह के बयान पर विपक्ष का जोरदार हंगामा

  • नेता प्रतिपक्ष यहां कम आते हैं

  • एनडीए ने ऐसा कदम नहीं उठाया

  • अध्यक्ष पर संदेह निंदनीय भी है

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: लोक सभा में बुधवार को उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी की सदन में उपस्थिति के आंकड़े पेश किए। शाह ने बताया कि 15वीं से 17वीं लोक सभा के दौरान राहुल गांधी की उपस्थिति औसत से काफी कम रही है। उन्होंने कहा, 17वीं लोक सभा में राहुल गांधी की उपस्थिति 51 प्रतिशत थी जबकि औसत 66 प्रतिशत था; वहीं 16वीं लोक सभा में उनकी उपस्थिति 52 प्रतिशत थी जबकि औसत 80 प्रतिशत था। इस बयान के बाद विपक्षी सांसदों ने अमित शाह माफी मांगो के नारे लगाते हुए सदन में कड़ा विरोध दर्ज कराया।

अमित शाह ने विपक्ष द्वारा अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि भारतीय संसदीय इतिहास में अब तक केवल तीन बार अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, लेकिन भाजपा या एनडीए ने कभी ऐसा कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा, सदन आपसी विश्वास पर चलता है और अध्यक्ष सदन की गरिमा के संरक्षक होते हैं। यह कोई मेला या उत्सव नहीं है, यहाँ नियमों के अनुसार चलना होता है। अध्यक्ष के फैसलों पर सवाल उठाना बेहद खेदजनक और निंदनीय है। शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि असंसदीय शब्दों को हटाने का अधिकार अध्यक्ष के पास है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।

विपक्ष ने लगाया तानाशाही का आरोप दूसरी ओर, विपक्षी सांसदों ने अध्यक्ष के आचरण पर गंभीर आरोप लगाए। आरजेडी (RJD) सांसद अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि अध्यक्ष की कुर्सी अब सदन की स्वतंत्रता के बजाय सत्तापक्ष की तानाशाही का प्रतीक बन गई है। उन्होंने उस काले दिन का भी जिक्र किया जब एक ही दिन में 140 से अधिक सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। झामुमो (JMM) के विजय कुमार हांसदा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि सदन में नेहरू के बाद सबसे ज्यादा बोला जाने वाला शब्द नो (नहीं) बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्षी सांसद बोलते हैं, तो कैमरा दूसरी दिशा में घुमा दिया जाता है।

एनसीपी (SP) के बजरंग मनोहर सोनवणे ने एक दिलचस्प उपमा देते हुए कहा, अध्यक्ष महोदय एक टेबल फैन की तरह हैं जो केवल एक तरफ हवा देता है। जब वे दाईं ओर (सत्तापक्ष) देखते हैं तो उनके चेहरे पर मुस्कान होती है, लेकिन दूसरी तरफ देखते ही वे केवल नो, नो, नो कहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव जीत के लिए नहीं, बल्कि अपने लोकतांत्रिक अधिकारों को रेखांकित करने के लिए लाया गया था।