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विपक्ष ने इतने दिनों की सारी कसर पूरी कर ली

अविश्वास प्रस्ताव पर दोनों पक्षों की बहस

  • ओम बिड़ला के खिलाफ था प्रस्ताव

  • महिला सांसदों ने भी आरोप की निंदा की

  • विपक्षी सांसदों ने घटनाक्रम भी गिनाये

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने मंगलवार को लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला का पुरजोर बचाव किया, जबकि विपक्षी दलों ने उन पर सरकारी दबाव में काम करने और सदन की कार्यवाही निष्पक्ष रूप से न चलाने का आरोप लगाया। यह बहस विपक्ष द्वारा बिरला को हटाने के संकल्प प्रस्ताव के बाद शुरू हुई, जिसमें उन पर पक्षपात और महिला सांसदों के खिलाफ निराधार आरोप लगाने के दावे किए गए। विपक्ष का यह भी आरोप था कि उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने की अनुमति नहीं दी।

संविधान अध्यक्ष को कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति देता है, लेकिन बिरला इसमें उपस्थित नहीं हुए। इस चर्चा का समापन बुधवार को होने की संभावना है, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस प्रस्ताव पर जवाब देंगे। बहस की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि यह कदम संसदीय लोकतंत्र और संविधान की गरिमा बचाने के लिए आवश्यक था। उन्होंने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को बार-बार टोका गया और उनके खड़े होने के बावजूद दूसरे सदस्य को बोलने का मौका दिया गया।

शिवसेना के अरविंद सावंत और तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने भी अध्यक्ष के आचरण पर सवाल उठाए। मोइत्रा ने इसे दैवीय न्याय बताते हुए कहा कि उन्हें 2023 में गलत तरीके से निष्कासित किया गया था। वहीं, डीएमके नेता टी.आर. बालू ने बिरला को सज्जन तो कहा, लेकिन विपक्षी सांसदों के खिलाफ उनकी कठोर कार्रवाई की आलोचना की।

NDA का पक्ष और विपक्ष पर पलटवार दूसरी ओर, सत्तापक्ष ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्षी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई उनके अनुचित व्यवहार के कारण हुई थी। उन्होंने कांग्रेस पर 2014 से ही संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। रिजिजू ने दावा किया कि 50 विपक्षी सांसदों ने निजी तौर पर इस प्रस्ताव के प्रति अपनी असहमति जताई है, लेकिन वे राजनीतिक दबाव में इसका समर्थन कर रहे हैं।

रिजिजू ने राहुल गांधी के संसद में व्यवहार की भी आलोचना की और कहा कि प्रियंका गांधी वाड्रा एक बेहतर विपक्ष की नेता साबित हो सकती हैं। इस पर प्रियंका गांधी ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह विडंबना है कि जो लोग दिन-रात नेहरू जी की आलोचना करते हैं, आज अपनी दलीलों के लिए उन्हीं के उद्धरणों का सहारा ले रहे हैं। टीडीपी और जदयू जैसे एनडीए सहयोगियों ने भी बिरला का समर्थन करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में संसद की उत्पादकता बढ़ी है और यह प्रस्ताव केवल सुर्खियां बटोरने के लिए लाया गया है।