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भारत-इंडोनेशिया रक्षा समझौता का औपचारिक खुलासा हुआ

ब्रह्मोस मिसाइल की खरीद पर मुहर

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: भारत की रक्षा कूटनीति और मेक इन इंडिया अभियान को एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता मिली है। इंडोनेशिया ने आधिकारिक तौर पर भारत के साथ स्वदेशी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली की खरीद के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। सोमवार को इंडोनेशियाई रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रिको रिकार्डो सिरायत ने इस रक्षा सौदे की पुष्टि करते हुए इसे दक्षिण-पूर्व एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन की दृष्टि से एक निर्णायक कदम बताया।

इंडोनेशियाई प्रवक्ता के अनुसार, यह समझौता उनके सैन्य हार्डवेयर और रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण की व्यापक योजना का हिस्सा है। विशेष रूप से जकार्ता अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय जलक्षेत्र की संप्रभुता को बनाए रखने के लिए इंडोनेशिया अपनी तटीय रक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाना चाहता है, जिसमें ब्रह्मोस जैसी मारक मिसाइल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

हालांकि इंडोनेशियाई अधिकारियों ने इस सौदे के कुल वित्तीय मूल्य की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों और पिछले बयानों के आधार पर इसकी अनुमानित लागत 200 मिलियन डॉलर से 350 मिलियन डॉलर (लगभग 1,600 से 2,900 करोड़ रुपये) के बीच होने की संभावना है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस, जो भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओ माशिनोस्त्रोयेनिया का एक संयुक्त उद्यम है, पिछले काफी समय से जकार्ता के साथ तकनीकी और वाणिज्यिक चर्चा कर रहा था।

भारत के लिए यह समझौता फिलीपींस के साथ 2022 में हुए 375 मिलियन डॉलर के सौदे के बाद दूसरा बड़ा विदेशी निर्यात ऑर्डर है। ब्रह्मोस मिसाइल अपनी गति (2.8 मैक) और अचूक मारक क्षमता के कारण दुनिया की सबसे घातक सुपरसोनिक मिसाइलों में गिनी जाती है। फिलीपींस और अब इंडोनेशिया द्वारा इसे अपनाना यह दर्शाता है कि दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए नई दिल्ली की ओर एक विश्वसनीय रक्षा भागीदार के रूप में देख रहे हैं। यह सौदा न केवल भारत के 35,000 करोड़ रुपये के वार्षिक रक्षा निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।