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केदारनाथ से कन्याकुमारी तक घुसपैठिया बाहर होगा

उत्तराखंड के हरिद्वार में केंद्रीय गृह मंत्री का बयान

राष्ट्रीय खबर

देहरादूनः 7 मार्च, 2026 को हरिद्वार में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश की सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर एक कड़ा संदेश दिया है। उत्तराखंड सरकार के चार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने घोषणा की कि केंद्र सरकार देश से हर एक घुसपैठिये को बाहर निकालने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह प्रक्रिया केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि केदारनाथ से कन्याकुमारी तक पूरे देश में प्रभावी ढंग से लागू की जाएगी। शाह ने स्पष्ट किया कि विपक्ष चाहे कितना भी विरोध कर ले, राष्ट्रहित में यह कदम पीछे नहीं खींचा जाएगा।

अपने संबोधन के दौरान, गृह मंत्री ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने धामी को देश का वह पहला मुख्यमंत्री बताया जिसने राज्य में समान नागरिक संहिता को सफलतापूर्वक लागू किया। शाह ने कहा कि यूसीसी के तहत अब हर नागरिक, चाहे उसका धर्म कुछ भी हो, समान कानून के दायरे में होगा।

उन्होंने दावा किया कि यह कानून जनसांख्यिकी में होने वाली अप्राकृतिक वृद्धि को रोकने में मददगार साबित होगा। इसी संदर्भ में उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसांख्यिकीय परिवर्तनों की समस्या से निपटने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाने का निर्णय लिया है, जो कुछ ही दिनों में अपना कार्य शुरू कर देगी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उत्तराखंड में सरकारी भूमि से लगभग 10,000 एकड़ अतिक्रमण हटाने के साहसिक निर्णय की भी सराहना की।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए शाह ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन के विरोध को लोकतंत्र के लिए घातक बताया। उन्होंने तर्क दिया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक स्वच्छ और पारदर्शी मतदाता सूची अनिवार्य है, और जो लोग भारत के नागरिक नहीं हैं, उनके नाम सूची से हटाए ही जाने चाहिए।

उन्होंने उत्तराखंड राज्य के निर्माण के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने ही उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों का सपना साकार किया था, जो आज विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। शाह ने अनुच्छेद 370 को हटाना, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, और केदारनाथ-बद्रीनाथ मंदिरों के पुनर्विकास जैसे ऐतिहासिक निर्णयों को मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धियों के रूप में गिनाया।

एक और महत्वपूर्ण घोषणा में गृह मंत्री ने देश की न्याय प्रणाली में क्रांतिकारी बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा आपराधिक कानूनों में किए गए संशोधनों से न्याय मिलने की गति तेज होगी। उन्होंने लक्ष्य निर्धारित किया कि 2028 तक भारत का न्यायिक ढांचा ऐसा होगा कि प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक की पूरी प्रक्रिया में तीन साल से अधिक का समय नहीं लगेगा।

सीएए के तहत नागरिकता पाने वाले शरणार्थियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं, सिखों, बौद्धों और जैनियों का भारत पर उतना ही अधिकार है जितना प्रधानमंत्री मोदी का। उन्होंने तुष्टीकरण की राजनीति की निंदा करते हुए कहा कि अब शरणार्थियों को उनका सम्मान वापस मिल रहा है।