प्रस्ताव का समर्थन करेंगे उनके सांसद
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ममता बनर्जी का निर्देश जारी किया
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संसद में कुल चालीस सांसद हैं
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नोटिस का समर्थन नहीं किया था
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अपने पिछले रुख को बदलते हुए अब इसका समर्थन करने का निर्णय लिया है। कुछ सप्ताह पहले तक टीएमसी के सांसदों ने इस प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था, लेकिन अब यह जानकारी सामने आई है कि दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में पार्टी के सांसद चर्चा के दौरान इस प्रस्ताव का साथ देंगे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने स्वयं सांसदों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। पार्टी के कम से कम दो सांसदों ने इस बात की पुष्टि की है कि नेतृत्व की ओर से उन्हें प्रस्ताव के पक्ष में खड़े होने को कहा गया है। वर्तमान में, राज्यसभा में टीएमसी के 12 सदस्य हैं, जबकि लोकसभा में उनकी संख्या 28 है। टीएमसी का यह समर्थन विपक्षी एकजुटता के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस अविश्वास प्रस्ताव की नींव 10 फरवरी को रखी गई थी, जब विपक्ष ने 118 सांसदों के हस्ताक्षरित नोटिस को अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ पेश किया था। इस विवाद के मुख्य रूप से दो प्रमुख कारण रहे हैं। जनरल नरवणे की संस्मरण पर रोक: विपक्ष का आरोप है कि अध्यक्ष ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित यादों के अंश उद्धृत करने या उस पर बोलने की अनुमति नहीं दी। विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की आजादी और संसदीय चर्चा पर अंकुश मान रहा है।
सदन में हंगामे के दौरान अध्यक्ष ओम बिरला ने एक विवादास्पद दावा किया था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में न आने की चेतावनी दी थी, क्योंकि वहां उन पर हमला हो सकता था। इस बयान और उसके बाद हुए भारी हंगामे के बीच, अध्यक्ष ने विपक्ष के आठ सांसदों को सदन से निलंबित कर दिया था। उस वक्त टीएमसी ने इस प्रस्ताव का समर्थन करने से ना सिर्फ इंकार किया था बल्कि इसे समय से पहले उठाया गया कदम बताया था।
टीएमसी के पहले के हिचकिचाहट भरे रुख ने विपक्षी गठबंधन के भीतर दरार के संकेत दिए थे। हालांकि, अब ममता बनर्जी के इस फैसले के बाद विपक्ष अधिक एकजुट नजर आ रहा है। यद्यपि संख्या बल के हिसाब से अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम है, लेकिन टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों का जुड़ाव सरकार और अध्यक्ष के कामकाज के तरीके पर नैतिक और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए पर्याप्त है। दूसरी तरफ लोग यह मान रहे हैं कि बंगाल के विधानसभा चुनाव के करीब आने के वक्त केंद्र सरकार का तेवर भी टीएमसी सुप्रिमो को कड़ा तेवर अपनाने पर मजबूर कर रहा है।