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ममता बनर्जी के मंच से रामकृष्ण मिशन के अध्यक्ष का बयान

अब मेरा नाम भी मतदाता सूची से बाहर है

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय एक नया मोड़ आ गया जब उत्तर 24 परगना स्थित एक रामकृष्ण शारदा मिशन के अध्यक्ष, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के धरना मंच पर उपस्थित हुए। धर्मतला के मेट्रो चैनल पर आयोजित इस धरने के दौरान, एक सन्यासी ने शिकायत की कि उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए सन्यासी को अपनी बात रखने के लिए मंच प्रदान किया।

सन्यासी का पक्ष और अनुयोग मंच पर उपस्थित सन्यासी ने बताया कि वह पिछले 14 वर्षों से मीनाखाँ स्थित रामकृष्ण शारदा मिशन के अध्यक्ष के रूप में सेवा दे रहे हैं। उन्होंने स्वयं को बेलूर मठ के दसवें अध्यक्ष, स्वामी वीरेश्वरानंद का मंत्र-शिष्य बताया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, मैं आज दीदी (ममता बनर्जी) के पास आया हूँ। मैंने उनसे कहा कि यदि इसी तरह चलता रहा, तो देश की स्थिति बहुत खराब हो जाएगी। मैं इस धरना मंच से प्रार्थना करता हूँ कि सत्य की जीत हो और यह भेदभावपूर्ण व्यवस्था समाप्त हो।

मुख्यमंत्री ने सन्यासी का समर्थन करते हुए उनसे अपने दस्तावेज सार्वजनिक रूप से दिखाने को कहा। सन्यासी ने दावा किया कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज था, जिसे अब हटा दिया गया है। इस पर ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में भारी अनियमितताएँ हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, मैं यहाँ ऐसे सात लोगों को पेश कर सकती हूँ जिन्हें अंतिम मतदाता सूची में मृत घोषित कर दिया गया है। लगभग 5 लाख जीवित लोगों को कागजों पर मृत दिखाकर उनके मताधिकार छीने जा रहे हैं। ममता बनर्जी का यह धरना केंद्र सरकार की नीतियों और विशेष रूप से मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर के खिलाफ है।

रामकृष्ण मिशन जैसे सम्मानित आध्यात्मिक संस्थान से जुड़े व्यक्ति की उपस्थिति ने इस विरोध प्रदर्शन को एक नई चर्चा का विषय बना दिया है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि जानबूझकर एक खास रणनीति के तहत वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से गायब किए जा रहे हैं, जबकि विपक्ष इन आरोपों को निराधार बता रहा है।