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पत्रकार हत्याकांड में राम रहीम बरी

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का फैसला आया

  • सांध्य अखबार चलाते थे छत्रपति

  • उन्हें पांच गोलियां मारी गयी थी

  • निचली अदालत ने दोषी पाया था

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़ः पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक पत्रकार की हत्या के मामले में बरी कर दिया है। इस मामले में वह उम्रकैद की सजा काट रहा था। हालांकि, इस फैसले के बावजूद वह जेल में ही रहेगा, क्योंकि वह दो महिला अनुयायियों के साथ बलात्कार के एक अलग मामले में अपनी सजा पूरी कर रहा है।

डेरा प्रमुख को 2019 में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120 बी (अपराधिक षड्यंत्र) के तहत तीन अन्य लोगों के साथ दोषी ठहराया गया था। पंचकूला की एक विशेष केंद्रीय जांच ब्यूरो अदालत ने उन्हें पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

यह मामला साल 2002 का है, जब हरियाणा के सिरसा में पत्रकार छत्रपति की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। छत्रपति ने अपने सांध्य समाचार पत्र पूरा सच में एक गुमनाम पत्र प्रकाशित किया था, जिसमें डेरा की एक महिला अनुयायी ने राम रहीम पर बलात्कार के गंभीर आरोप लगाए थे। इस खबर के प्रकाशन के कुछ समय बाद ही छत्रपति पर हमला हुआ; उन्हें पांच गोलियां मारी गई थीं और कुछ दिनों बाद उन्होंने दम तोड़ दिया था।

शनिवार को राम रहीम के वकील जितेंद्र खुराना ने मीडिया को जानकारी दी कि उच्च न्यायालय ने पत्रकार हत्याकांड में उन्हें दोषमुक्त कर दिया है। खुराना ने कहा, हमने हमेशा यह तर्क दिया था कि राम रहीम के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे थे।

मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने गुरमीत राम रहीम को बरी करने का आदेश सुनाया। हालांकि, अदालत ने इस मामले के दो अन्य आरोपियों—निर्मल और कुलदीप—की अपीलों को खारिज कर दिया, जिसका अर्थ है कि उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रहेगी। इस मामले के एक अन्य आरोपी किशन लाल की 2024 में मृत्यु हो गई थी।

भले ही राम रहीम को इस हत्या के मामले में राहत मिल गई हो, लेकिन उसे तुरंत रिहा नहीं किया जाएगा। वह 2017 में एक अदालत द्वारा सुनाई गई 20 साल की कैद की सजा काट रहा है। यह सजा उसे दो साध्वियों के साथ बलात्कार का दोषी पाए जाने पर दी गई थी। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि हत्या के मामले में बरी होना राम रहीम के लिए एक बड़ी कानूनी जीत है, लेकिन बलात्कार के मामले की सजा उसे अभी भी सलाखों के पीछे रखेगी।