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कोविड वैक्सिन से खून के थक्कों की गुत्थी सुलझी, “राष्ट्रीय खबर की रिपोर्ट

दुनिया को भयभीत करने वाली महामारी का राज खुला

  • टीकाकरण के बाद इसका पता चला था

  • विश्व के लाखों लोग इससे प्रभावित हुए

  • प्रतिरक्षा तंत्र के भ्रम की वजह से ऐसा हुआ

राष्ट्रीय खबर

रांचीः कोविड महामारी ने दुनिया को अज्ञात तरीके से भयभीत कर दिया था। यह भी सच है कि इस बीमारी की वजह से करोड़ों लोग अचानक ही काल कवलित हो गये थे। उस दौरान लोगों की जान बचाने के लिए वैक्सिन भी बना था। इस वैक्सिन की वजह से अनेक लोगों के खून में थक्के जमने की परेशानी की सूचना मिली थी। न के थक्के जमना (ब्लड क्लॉटिंग)। वैज्ञानिकों के लिए तब एक पहेली बना हुआ था कि कुछ लोगों में वैक्सीन लगने के बाद ऐसा क्यों होता है। अब ऑस्ट्रेलिया की फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस रहस्य को सुलझा लिया है।

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गलती से खुद के शरीर पर हमला शोधकर्ताओं ने पाया कि यह समस्या मुख्य रूप से उन वैक्सीन के साथ देखी गई जो एडेनोवायरस तकनीक पर आधारित थीं (जैसे एस्ट्राजेनेका)। अध्ययन के अनुसार, बहुत ही कम मामलों में हमारा इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा तंत्र) भ्रमित हो जाता है। वह वायरस के एक सामान्य प्रोटीन और मानव शरीर के खून में पाए जाने वाले एक खास प्रोटीन, जिसे प्लेटलेट फैक्टर 4 (पीएफ 4) कहते हैं, के बीच अंतर नहीं कर पाता।

आसान भाषा में कहें तो, शरीर का रक्षा तंत्र वायरस के प्रोटीन को मारने के चक्कर में गलती से खून के प्रोटीन पर हमला कर देता है। इस गलत पहचान के कारण शरीर में ऐसी एंटीबॉडीज बनने लगती हैं जो खून को जमाने या थक्के बनाने की प्रक्रिया को सक्रिय कर देती हैं। इसे वैज्ञानिक भाषा में वीआईटीटी (वैक्सीन-प्रेरित इम्यून थ्रोम्बोसाइटोपेनिया और थ्रोम्बोसिस) कहा जाता है।

संक्रमण से भी हो सकता है खतरा इस रिसर्च की एक बड़ी बात यह भी है कि यह समस्या केवल वैक्सीन से ही नहीं, बल्कि सामान्य एडेनोवायरस संक्रमण (जैसे सर्दी-जुकाम) से भी हो सकती है। वैज्ञानिकों ने पाया कि वैक्सीन और प्राकृतिक संक्रमण दोनों ही मामलों में एंटीबॉडीज बिल्कुल एक जैसी थीं। इसका मतलब है कि समस्या वैक्सीन के किसी बाहरी तत्व में नहीं, बल्कि खुद वायरस के उस खास प्रोटीन में थी।

अब और सुरक्षित होंगी भविष्य की वैक्सीन इस खोज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब वैज्ञानिकों को पता चल गया है कि समस्या कहाँ है। शोधकर्ता डॉ. जिंग जिंग वांग के अनुसार, अब वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां भविष्य में एडेनोवायरस के उस खास प्रोटीन को बदल सकती हैं या हटा सकती हैं जो इस भ्रम की स्थिति को पैदा करता है।

इससे भविष्य में बनने वाली वैक्सीन न केवल बीमारियों से लड़ने में कारगर होंगी, बल्कि पहले से कहीं अधिक सुरक्षित भी होंगी। यह खोज चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जो दुनिया भर में वैक्सीन के प्रति विश्वास को और मजबूत करेगी।

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