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कई राज्यों के राज्यपाल बदल दिये गये

अचानक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के यहां से जारी हुआ आदेश

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 मार्च 2026 को देश के नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपालों और उपराज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल की एक बड़ी सूची जारी की है। इस फेरबदल का सबसे प्रमुख आकर्षण अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरणजीत सिंह संधू की दिल्ली के नए उपराज्यपाल के रूप में नियुक्ति है। यह प्रशासनिक बदलाव आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले केंद्र सरकार की एक बड़ी रणनीतिक पहल माना जा रहा है।

पिछले कुछ समय से दिल्ली के उपराज्यपाल पद पर आसीन विनय कुमार सक्सेना को अब लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति लद्दाख के निवर्तमान उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता के इस्तीफे के बाद हुई है। कविंदर गुप्ता को अब हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। तरणजीत सिंह संधू, जो 1988 बैच के एक अनुभवी राजनयिक हैं, दिल्ली में सक्सेना की जगह लेंगे। संधू का विशाल राजनयिक अनुभव दिल्ली जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन में नई ऊर्जा भरने की उम्मीद जगाता है।

पश्चिम बंगाल में सी.वी. आनंद बोस के अचानक इस्तीफे के बाद, तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। रवि की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और राजभवन व राज्य सरकार के बीच समन्वय एक बड़ी चुनौती है। तमिलनाडु में राज्यपाल का पद रिक्त होने के कारण केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को अस्थायी रूप से तमिलनाडु के कार्यों का निर्वहन करने की जिम्मेदारी दी गई है।

राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, कई अन्य राज्यों में भी अनुभवी चेहरों को नई जिम्मेदारी दी गई है:

सेना के दिग्गज और चिनार कॉर्प्स के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल बनाया गया है। तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को अब महाराष्ट्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को अब तेलंगाना भेजा गया है। बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

राजनयिकों और सैन्य दिग्दजों को संवैधानिक पदों पर लाने का यह कदम केंद्र सरकार की उस नीति को दर्शाता है जिसमें विशेषज्ञता और प्रशासनिक अनुभव को प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषकर दिल्ली और बंगाल जैसे राज्यों में इन नियुक्तियों का राजनीतिक महत्व काफी अधिक है, क्योंकि ये राज्य अगले कुछ महीनों में चुनावी सरगर्मियों के केंद्र होंगे।