नीतीश दिल्ली तो पटना में सीएम कौन
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव हुए अभी छह महीने भी नहीं बीते हैं कि राज्य की राजनीति में एक बड़े फेरबदल की आहट सुनाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़कर संभवतः फिर से राष्ट्रीय राजनीति की ओर रुख कर सकते हैं। उन्हें राज्यसभा भेजने को लेकर चर्चाएं तेज हैं। वहीं, उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। माना जा रहा है कि पटना में होने वाली एनडीए विधायक दल की बैठक में इन समीकरणों पर अंतिम मुहर लग सकती है।
खबरों के मुताबिक, जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा बुधवार सुबह दिल्ली से पटना पहुंचे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ लंबी चर्चा की। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) भी गुरुवार सुबह दिल्ली से पटना पहुंचने वाले हैं। ये तमाम गतिविधियां बिहार की सियासत में बड़े बदलाव का संकेत दे रही हैं। दशकों से बिहार की राजनीति में ‘चाणक्य’ की भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार के इस कदम को सत्ता हस्तांतरण के एक विस्तृत रोडमैप के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पटना में एनडीए विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार का राज्यसभा का निर्णय हो सकता है। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर दिल्ली की राजनीति में सक्रिय हो सकते हैं। उन्हें जेडीयू कोटे से राज्यसभा भेजा जा सकता है। नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को बिहार का उपमुख्यमंत्री नियुक्त कर सक्रिय राजनीति में लाया जा सकता है। जेडीयू के कई वरिष्ठ मंत्रियों और नेताओं ने पहले ही निशांत के राजनीति में आने का स्वागत किया है। यदि नीतीश कुमार दिल्ली जाते हैं, तो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मुख्यमंत्री का पद मिल सकता है। इस दौड़ में वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे है। इससे बिहार में एक नई सरकार का स्वरूप सामने आएगा।
संजय झा ने पटना पहुंचकर मुख्यमंत्री के साथ करीब एक घंटे तक बैठक की है। माना जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान के साथ नीतीश के इस ‘एग्जिट प्लान’ पर पहले ही चर्चा हो चुकी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का पटना आना भी इस पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की कोशिश माना जा रहा है।
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए ने भारी बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। ऐसे में मुख्यमंत्री पद बीजेपी को सौंपकर खुद राज्यसभा जाना और बेटे के लिए उपमुख्यमंत्री का पद सुरक्षित करना, नीतीश कुमार की भविष्य की एक बड़ी योजना का हिस्सा लग रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह गणित शायद चुनाव से पहले ही तय कर लिया गया था।