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ईरान का कलस्टर बम, इजरायल दहशत में

रूस और चीन की भागीदारी पर उठ रहे हैं सवाल

दुबईः इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। इजरायली सेना ने सनसनीखेज दावा किया है कि ईरान अब तेल अवीव को निशाना बनाने के लिए प्रतिबंधित कलस्टर बम मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है। इस खुलासे के बाद अंतरराष्ट्रीय गलियारों में यह सवाल गूँज रहा है कि ईरान के पास यह घातक तकनीक कहाँ से आई? सैन्य विशेषज्ञों के बीच इस बात की प्रबल चर्चा है कि क्या रूस और चीन पर्दे के पीछे से ईरान को इन हथियारों की आपूर्ति कर रहे हैं। यदि यह सच साबित होता है, तो अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान के इस युद्ध की पूरी दिशा ही बदल जाएगी।

कलस्टर का शाब्दिक अर्थ है एक गुच्छा। एक कलस्टर बम असल में एक बड़ा मिसाइल खोल होता है, जिसके भीतर दर्जनों छोटे-छोटे बम भरे होते हैं। इजरायली सेना के अनुसार, ईरान द्वारा दागी गई मिसाइल का मुख जमीन से लगभग 7 किलोमीटर की ऊँचाई पर ही खुल गया। इसके भीतर से कम से कम 20 छोटे बम निकले, जो तेल अवीव और उसके आस-पास के घनी आबादी वाले इलाकों में फैल गए।

इन बमों की सबसे भयावह विशेषता यह है कि ये गिरने पर तुरंत नहीं फटते। ये जमीन पर तब तक सक्रिय रहते हैं जब तक कि कोई इनके संपर्क में न आए। इस कारण ये बैलिस्टिक मिसाइलों से भी अधिक खतरनाक माने जाते हैं क्योंकि आम नागरिक अनजाने में इनका शिकार बन सकते हैं, जिससे जान-माल की भारी हानि होती है।

कलस्टर बमों के व्यापक विनाशकारी प्रभाव को देखते हुए 2008 में कन्वेन्शन ऑन कलस्टर म्यूनिशन के तहत इनके भंडारण और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। दुनिया के 111 देशों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान जैसे प्रमुख सैन्य देशों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास ये हथियार नए नहीं हैं; पिछले साल के संघर्ष में भी उन पर ऐसे ही आरोप लगे थे। हाल ही में अमेरिका द्वारा यूक्रेन को रूस के खिलाफ कलस्टर बम दिए जाने के बाद, अब ईरान का यह कदम युद्ध के मैदान में जैसे को तैसा वाली स्थिति पैदा कर रहा है।