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म्यांमार सैन्य हमले में 25 की मौत: व्यापारिक केंद्र पर बरसे बम

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट का कहर  सामने नजर आया

बैंकॉक: म्यांमार में जारी गृहयुद्ध के बीच सैन्य जुंटा द्वारा नागरिकों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं में भीषण वृद्धि हुई है। रविवार सुबह, म्यांमार के मध्य मैगवे क्षेत्र में जुंटा के लड़ाकू विमानों द्वारा किए गए बर्बर हवाई हमलों में कम से कम 25 लोगों की जान चली गई है, जबकि 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

यह दर्दनाक घटना मैगवे के प्योंग गांव के पास स्थित एक प्रमुख व्यापारिक जंक्शन पर हुई। यह क्षेत्र स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक जीवन-रेखा की तरह है, जहाँ दूर-दराज के इलाकों से आने वाले व्यापारी और ट्रक चालक वस्तुओं का आदान-प्रदान करते हैं। चश्मदीदों के अनुसार, रविवार सुबह जब बाजार में सामान्य चहल-पहल थी, तभी म्यांमार वायुसेना के दो लड़ाकू विमानों ने अचानक आसमान में दस्तक दी और जंक्शन पर दो बार ताबड़तोड़ बमबारी की। इस हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि वहां मौजूद 14 मालवाहक वाहन देखते ही देखते आग के गोले में बदल गए और पूरी तरह जलकर खाक हो गए। विस्फोट के बाद मची अफरा-तफरी में कई लोग अपने वाहनों और सामान के बीच फंस गए।

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों में एक बड़ा हिस्सा राखीन राज्य से आए व्यापारियों का है। राखीन राज्य वर्तमान में म्यांमार के सबसे अस्थिर क्षेत्रों में से एक है, जहां शक्तिशाली जातीय सशस्त्र समूह अराकान आर्मी जुंटा की सेना के खिलाफ सक्रिय है। विश्लेषकों का मानना है कि सैन्य जुंटा का यह हमला रणनीतिक रूप से उन क्षेत्रों की आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करने का प्रयास हो सकता है जहां विद्रोही समूहों का प्रभाव है। व्यापारियों और नागरिक परिवहन को निशाना बनाकर जुंटा यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह विद्रोहियों को रसद पहुंचाने वाले किसी भी स्रोत को सहन नहीं करेगा।

म्यांमार में सैन्य शासन के खिलाफ जारी संघर्ष में नागरिकों पर हवाई हमलों की आवृत्ति चिंताजनक रूप से बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इसे बार-बार ‘युद्ध अपराध’ की श्रेणी में रखा है। इस हमले के बाद स्थानीय निवासियों में भारी दहशत है और घायलों को उपचार के लिए कठिन परिस्थितियों में नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है। सैन्य जुंटा की ओर से अभी तक इस हमले पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी गई है, लेकिन यह घटना म्यांमार में चल रहे गहरे मानवीय और राजनीतिक संकट को और अधिक गहरा करने वाली है।