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ऑस्ट्रेलिया में बड़े साइबर हमले की चेतावनी

प्रमुख बैंकिंग प्रणालियों में असामान्य गतिविधिया दर्ज

सिडनी: ऑस्ट्रेलियाई साइबर सुरक्षा केंद्र ने पिछले छह घंटों में पूरे देश के लिए एक क्रिटिकल अलर्ट (अत्यंत गंभीर चेतावनी) जारी की है। यह कार्रवाई तब की गई जब सरकारी डेटा केंद्रों और देश की प्रमुख बैंकिंग प्रणालियों के ट्रैफिक पैटर्न में बड़े पैमाने पर असामान्य और संदिग्ध गतिविधियां दर्ज की गईं। प्रारंभिक तकनीकी जांच इस ओर इशारा कर रही है कि यह एक संगठित और बड़े स्तर का डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस हमला है।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, यह हमला एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हमलावर हजारों या लाखों संक्रमित कंप्यूटरों (बोटनेट्स) के माध्यम से किसी सर्वर पर इतना अधिक ट्रैफिक भेज देते हैं कि वह सर्वर क्रैश हो जाता है। इस हमले का स्पष्ट उद्देश्य ऑस्ट्रेलिया की डिजिटल बुनियादी संरचना को पूरी तरह ठप्प करना और वित्तीय लेनदेन को बाधित करना है। सिडनी और मेलबर्न जैसे प्रमुख केंद्रों में स्थित आईटी कंपनियों और डेटा केंद्रों को तुरंत अपने फायरवॉल अपडेट करने और सभी बाहरी एक्सेस को सीमित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री ने एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस स्थिति को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि यह हमला अत्यधिक परिष्कृत है, जिसका अर्थ है कि इसे अंजाम देने के लिए बहुत उच्च स्तर की तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधनों का उपयोग किया गया है। सरकार ने इस बात की प्रबल संभावना जताई है कि इस हमले के पीछे किसी विदेशी राष्ट्र-राज्य समर्थित समूह  का हाथ हो सकता है, जो ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुँचाना चाहता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की टीमें संदिग्ध आईपी एड्रेस को ट्रैक करने और मुख्य सर्वरों को सुरक्षित करने के लिए वॉर-रूम स्तर पर चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। आम नागरिकों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ऑनलाइन बैंकिंग ट्रांजेक्शन करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें। किसी भी अनजान ईमेल, एसएमएस या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, क्योंकि इनका उपयोग मालवेयर फैलाने के लिए किया जा सकता है। अपने संवेदनशील खातों के पासवर्ड तुरंत बदलने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला ऑस्ट्रेलिया की डिजिटल संप्रभुता के लिए एक बड़ी परीक्षा है। यदि इन हमलों को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो इससे न केवल आर्थिक नुकसान होगा बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े डेटा के लीक होने का खतरा भी पैदा हो सकता है। फिलहाल, पूरे देश का आईटी बुनियादी ढांचा हाई-अलर्ट पर है।