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राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की मांग और सैन्य पहरा

बांग्लादेश में नई सरकार के सक्रिय होते ही नई परेशानी

ढाका: बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर एक निर्णायक और अस्थिर दौर से गुजर रही है। पिछले 24 घंटों में ढाका स्थित राष्ट्रपति आवास, बंगाभवन के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दिया गया है। नेशनल सिटीजन पार्टी और विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में हजारों प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के तत्काल इस्तीफे और उन पर महाभियोग चलाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं।

प्रदर्शनकारियों का मुख्य तर्क यह है कि राष्ट्रपति 2024 के जुलाई विद्रोह के दौरान अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने में विफल रहे। नेशनल सिटीजन पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रपति का उस समय का मौन और निष्क्रियता सीधे तौर पर हिंसा में उनकी मिलीभगत को दर्शाता है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि राष्ट्रपति तत्कालीन सरकार के प्रति वफादार रहे और अब वे नई अंतरिम और निर्वाचित व्यवस्था के कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।

बांग्लादेश के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति को पद से हटाना एक जटिल प्रक्रिया है। संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति पर संविधान के उल्लंघन या गंभीर कदाचार के आरोप में महाभियोग चलाया जा सकता है। इसके लिए संसद के कुल सदस्यों के बहुमत द्वारा हस्ताक्षरित एक नोटिस स्पीकर को देना होता है। यदि संसद के कुल सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो राष्ट्रपति को उसी दिन अपना पद छोड़ना होगा। हालांकि संविधान में यह प्रावधान है, लेकिन बांग्लादेश के इतिहास में अब तक किसी भी राष्ट्रपति को महाभियोग के जरिए नहीं हटाया गया है।

ढाका की सड़कों पर बख्तरबंद गाड़ियाँ और भारी पुलिस बल तैनात है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं, लेकिन पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच छिटपुट झड़पें जारी हैं। हाल ही में हुए आम चुनावों के बाद तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बावजूद, राष्ट्रपति के पद को लेकर बना यह गतिरोध देश की नई राजनीतिक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है और सभी पक्षों से शांति बनाए रखने तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करने की अपील की है।