वेणुगोपाल ने एमके स्टालिन से मुलाकात की
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सीटों और पावर शेयरिंग पर चर्चा
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पिछली बार 18 सीटों पर कांग्रेस जीती
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सोनिया गांधी की सीलबंद लिफाफा सौंपा
राष्ट्रीय खबर
चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने रविवार की रात चेन्नई के अलवरपेट स्थित मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के आवास पर उनसे मुलाकात की। लगभग 45 मिनट तक चली इस बैठक को आगामी चुनावों के लिए सीट-बंटवारे और गठबंधन की रणनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वेणुगोपाल के साथ तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के. सेल्वापेरुन्थागई और प्रदेश प्रभारी गिरीश चोडनकर भी मौजूद थे।
बैठक के दौरान कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री स्टालिन को पार्टी की अपेक्षाओं और उन निर्वाचन क्षेत्रों की सूची से अवगत कराया जहाँ से वे चुनाव लड़ना चाहते हैं। गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 25 सीटें दी गई थीं, जिनमें से उसने 18 पर जीत दर्ज की थी। इस बार कांग्रेस नेतृत्व 30 से अधिक सीटों की मांग कर रहा है।
हाल के दिनों में तमिलनाडु कांग्रेस के कुछ नेताओं ने राज्य सरकार में सत्ता में हिस्सेदारी की मांग उठाई थी, जिसे मुख्यमंत्री स्टालिन ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, वेणुगोपाल के साथ हुई इस उच्च-स्तरीय बैठक में कांग्रेस ने फिलहाल कैबिनेट में हिस्सेदारी की मांग को पीछे रखते हुए सीटों के सम्मानजनक बंटवारे और एक राज्यसभा सीट (संभावित उम्मीदवार पवन खेड़ा के लिए) पर ध्यान केंद्रित किया है।
इस मुलाकात का सबसे चर्चा में रहने वाला पहलू वह सीलबंद लिफाफा रहा, जो के.सी. वेणुगोपाल ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से मुख्यमंत्री स्टालिन को सौंपा। जानकारों का मानना है कि इस पत्र में गठबंधन की मजबूती और राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन के भविष्य को लेकर सोनिया गांधी का विशेष संदेश हो सकता है।
द्रमुक ने औपचारिक रूप से कांग्रेस की सीट-बंटवारा समिति को 26 या 27 फरवरी को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन वेणुगोपाल का उससे पहले ही स्टालिन से मिलना यह दर्शाता है कि कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व गठबंधन में किसी भी तरह की दरार नहीं चाहता और सीधे मुख्यमंत्री स्तर पर मुद्दों को सुलझाना चाहता है।
तमिलनाडु का आगामी चुनाव त्रिकोणीय होने की उम्मीद है। एक तरफ द्रमुक-कांग्रेस का सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस है, तो दूसरी तरफ भाजपा-अन्नाद्रमुक गठबंधन और अब अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम की एंट्री ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। द्रमुक इस बार द्रविड़ियन मॉडल 2.0 के नारे के साथ मैदान में है और अपने सहयोगियों के बीच सीटों का संतुलन बनाने की चुनौती का सामना कर रही है।