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संयुक्त किसान मोर्चा ने अब राष्ट्रपति मुर्मू को पत्र लिखा

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को बर्खास्त करें

  • अमेरिका के आगे घुटने टेक दिये हैं

  • राष्ट्रीय हितों की अनदेखी की गयी है

  • मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाया

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक औपचारिक पत्र भेजकर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को उनके पद से बर्खास्त करने की मांग की है। किसान संगठन ने आरोप लगाया है कि पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाकर देश के भरोसे के साथ विश्वासघात किया है। एसकेएम ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है ताकि प्रधानमंत्री को ऐसे किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करने से रोका जा सके, जिसकी शर्तें भारतीय किसानों के हितों के प्रतिकूल हों।

राष्ट्रपति को लिखे पत्र में एसकेएम ने गंभीर आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार संयुक्त राज्य अमेरिका के दबाव में झुक गई है और इससे देश की आत्मनिर्भरता तथा संप्रभुता खतरे में पड़ गई है। संगठन का दावा है कि अंतरिम समझौते के तहत स्वीकार की गई शर्तें भारतीय अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के लिए हानिकारक हैं। पत्र में कहा गया, मुख्य वार्ताकार के रूप में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल द्वारा की गई सभी घोषणाएं हमारे उस सबसे बड़े डर की पुष्टि करती हैं कि सरकार अमेरिकी फरमानों के सामने खड़े होने में या तो असमर्थ है या अनिच्छुक है। एक साम्राज्यवादी महाशक्ति के सामने इस तरह के आत्मसमर्पण ने किसान समुदाय के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने समझौते की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर कड़े सवाल उठाए हैं। पत्र के माध्यम से संगठन ने पूछा है कि यदि अभी तक किसी औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए थे, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा क्यों की?

एसकेएम ने सवाल किया कि जब संसद का सत्र चल रहा था, तब इस महत्वपूर्ण समझौते के संबंध में कोई आधिकारिक बयान सदन के पटल पर क्यों नहीं रखा गया? संगठन ने पूछा कि प्रधानमंत्री ने भारत को इस समझौते के एक पक्ष के रूप में समर्थन क्यों दिया, जबकि अभी तक इस पर देश के भीतर कोई आम सहमति या संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।

व्यापार समझौते के अलावा, एसकेएम ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय के उस हालिया आदेश पर भी आपत्ति जताई है जिसमें केरल सरकार को धान किसानों को दिया जाने वाला बोनस बंद करने का निर्देश दिया गया है। किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति से इस दिशा में भी हस्तक्षेप करने और केंद्र के इस आदेश को वापस लेने का निर्देश देने की मांग की है। संगठन का मानना है कि इस तरह के कदम सीधे तौर पर किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा पर प्रहार करते हैं।