हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भारी बमबारी
बेरुत: दक्षिण और मध्य लेबनान के आसमान में आज सुबह एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे, जब इजरायली रक्षा बलों ने हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाकर अब तक का सबसे व्यापक हवाई अभियान शुरू किया। इस सैन्य कार्रवाई ने न केवल सीमावर्ती इलाकों में तबाही मचाई है, बल्कि पूरे क्षेत्र को एक पूर्ण युद्ध की कगार पर धकेल दिया है।
इजरायली खुफिया विभाग के अनुसार, यह हमला पूरी तरह से रणनीतिक और सूचना-आधारित था। इजरायल का दावा है कि उन्होंने उन गुप्त कमांड सेंटरों और हथियार डिपो को ध्वस्त कर दिया है, जहाँ से उत्तरी इजरायल के रिहायशी इलाकों पर बड़े पैमाने पर रॉकेट हमले करने की योजना बनाई जा रही थी।
विशेष रूप से टायर और नबातियेह के आसपास के क्षेत्रों में भारी बमबारी की खबरें हैं। इजरायली सैन्य प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि जब तक हिजबुल्लाह अपनी सैन्य गतिविधियों को इजरायली सीमा से पीछे नहीं हटाता, तब तक ये हमले और तेज किए जाएंगे।
लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 6 घंटों की निरंतर बमबारी में अब तक 12 लोगों की मौत हो गई है और 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। स्थानीय बचाव दलों की रिपोर्टों के अनुसार, मलबे के नीचे अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। इस सैन्य कार्रवाई के कारण दक्षिण लेबनान में बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हो गया है। हजारों परिवार अपने घरों को छोड़कर उत्तर की ओर, विशेषकर बेरुत की ओर भाग रहे हैं, जिससे सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं और एक गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है।
इजरायली हमलों के जवाब में, हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल के गैलील क्षेत्र की ओर दर्जनों मिसाइलें और रॉकेट दागे हैं। रॉकेट हमलों की चेतावनी देने वाले सायरन पूरे उत्तरी इजरायल में गूँज रहे हैं, जिससे स्थानीय निवासी बंकरों और सुरक्षित स्थानों में शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। हिजबुल्लाह ने एक बयान में कहा कि यह दुश्मन की आक्रामकता का माकूल जवाब है।
एक ओर जहाँ अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र युद्धविराम की कोशिशों में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर दोनों पक्षों के रुख और कड़े हो गए हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा है कि उत्तरी इजरायल के नागरिकों की सुरक्षा के लिए सैन्य अभियान जारी रहेगा। लेबनानी सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। जैसे-जैसे सैन्य झड़पें तेज हो रही हैं, सीमा पर तनाव कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। यदि तत्काल कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष एक क्षेत्रीय तबाही का कारण बन सकता है।