एसआईआर प्रक्रिया से न्यायिक अधिकारियों को जोड़ने का निर्देश
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन को पूरा करने के लिए न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को राज्य की जनता की बड़ी जीत बताया है। सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह सेवारत और पूर्व न्यायिक अधिकारियों को एसआईआर कार्य में सहायता के लिए प्रतिनियुक्त करें।
तृणमूल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, आज का दिन चुनाव आयोग के अहंकार के ऐतिहासिक पतन का प्रतीक है। मुख्य चुनाव आयुक्त कभी खुद को सबसे ऊपर समझते थे, जिन्हें लगता था कि उनका शब्द ही अंतिम है। वह भ्रम अब चकनाचूर हो गया है। रोल ऑब्जर्वर्स वैध दावों को रोक रहे थे और अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर वैध मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रच रहे थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें करारा जवाब दिया है।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनावी राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 28 फरवरी तक संशोधित मतदाता सूची प्रकाशित करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप का स्वागत करते हुए बंगाल की सत्ताधारी पार्टी ने कहा कि अब सभी दावों, आपत्तियों और विसंगतियों के मामलों को कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नियुक्त निष्पक्ष न्यायिक अधिकारियों द्वारा देखा जाएगा।
तृणमूल ने आगे कहा, यह उस चुनाव आयोग के लिए एक झटका है जिसने अपने संवैधानिक कर्तव्य को त्याग कर भाजपा के निहित स्वार्थों के लिए एक पक्षपाती दस्ते का रूप ले लिया था। उन्हें वास्तविकता का एहसास कराया गया है कि जनता की संप्रभु शक्ति सत्ता में बैठे लोगों की तुच्छ महत्वाकांक्षाओं को कुचल देती है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस मामले में 4 फरवरी, 2026 को व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई थीं।
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल भाजपा के मुख्य प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा कि तृणमूल शुरू से ही एसआईआर का विरोध कर रही है और यदि विधानसभा चुनाव समय पर नहीं होते हैं, तो इसके लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बंगाल इकलौता राज्य है जहाँ बीडीओ कार्यालयों पर हमले हो रहे हैं और यहाँ कानून का नहीं, बल्कि पार्टी का शासन है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य में हिंसा की घटनाओं पर स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है। माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने एसआईआर को केंद्र सरकार की नियमावली से थोपा गया व्यवधान बताया, जबकि कांग्रेस ने मांग की कि 28 फरवरी तक अंतिम सूची प्रकाशित हो ताकि चुनाव कार्यक्रम में बाधा न आए।