Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
SDM Attack Hardoi: हरदोई में प्रशासनिक अधिकारी पर लाठी-डंडों से हमला; राशन वितरण में अनियमितता पर हु... Patna Coaching Firing Case: खान सर को मिली अग्रिम जमानत; कोचिंग सेंटर विवाद में कोर्ट का बड़ा फैसला Ram Mandir Donation Row: अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्र; ट्रस्ट के दान-चढ़ावे के विवाद पर बंद कमरे मे... Lucknow Crime News: नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त; पुलिस कमिश्नर से मांगा ज... Lucknow Crime News: पुलिस भर्ती परीक्षा देने आई छात्राओं से दरिंदगी की कोशिश; एनकाउंटर में गिरफ्तार ... Sitamarhi News: सीतामढ़ी में आंधी-बारिश का कहर; झोपड़ी पर गिरा विशाल पेड़, एक ही परिवार के 5 लोगों क... Noida Crime News: लग्जरी लाइफस्टाइल का शौक बन रहा युवाओं की बर्बादी का कारण; 217 युवा अब सलाखों के प... Weather Update: दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में गर्मी का कहर जारी; 11 जून से बारिश और राहत की उम्मीद परिमल नथवाणी का आना महज राजनीति नहीं मानिए क्वांटम प्रयोग में परमाणु उल्टा घूमता देखा गया

चुनाव के वक्त मुफ्त सौगातों पर नाराज सुप्रीम कोर्ट

विकास के लिए एक पैसा नहीं बचाया

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार सुबह राज्य सरकारों द्वारा चुनाव से पहले दी जाने वाली मुफ्त सौगातों की प्रथा पर कड़ी नाराजगी जताई। एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि यदि राज्य मुफ्त भोजन और मुफ्त बिजली देना जारी रखते हैं, तो वे वास्तविक विकास कार्यों के लिए धन कहाँ से लाएंगे।

चुनाव की ओर बढ़ रहे तमिलनाडु सरकार के उस प्रस्ताव ने इस तीखी टिप्पणी को जन्म दिया, जिसमें सभी उपभोक्ताओं को उनकी वित्तीय स्थिति पर विचार किए बिना मुफ्त बिजली देने की बात कही गई थी। अदालत ने उन राज्यों पर कटाक्ष किया जो सब्सिडी पर करोड़ों खर्च कर रहे हैं, जबकि वे स्वयं बजटीय घाटे में चल रहे हैं और विकास के लिए धन की कमी का रोना रोते हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, हम पूरे भारत में किस तरह की संस्कृति विकसित कर रहे हैं? सुबह मुफ्त भोजन, फिर मुफ्त साइकिल, फिर मुफ्त बिजली… और अब हम उस चरण में पहुँच रहे हैं जहाँ सीधे लोगों के खातों में नकदी ट्रांसफर की जा रही है। अदालत ने चेतावनी दी कि मुफ्त की यह संस्कृति लोगों को काम न करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

अदालत ने कहा कि प्रत्येक राज्य के राजस्व का कम से कम एक चौथाई हिस्सा विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पूछा, क्या बुनियादी ढांचे, अस्पतालों और स्कूलों के विकास के लिए खर्च करना आपका कर्तव्य नहीं है? इसके बजाय आप चुनाव के समय चीजें बांटते रहते हैं। पीठ में शामिल न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची ने सुझाव दिया कि यदि राज्य मुफ्त उपहार बांटना चाहते हैं, तो उन्हें इसे बजटीय आवंटन में रखना चाहिए और इसके खर्च का औचित्य सिद्ध करना चाहिए।

अदालत ने फरवरी 2025 की एक पिछली टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि इस तरह की नीतियां देश में परजीवियों का एक वर्ग पैदा कर सकती हैं। पिछले साल सेवानिवृत्त हुए न्यायमूर्ति बी.आर. गवई ने भी महाराष्ट्र की लाडकी बहिन योजना का उदाहरण देते हुए कहा था कि चुनाव की दहलीज पर घोषित इन मुफ्त सौगातों के कारण लोग काम करने के इच्छुक नहीं रह जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें बिजली संशोधन नियम 2024 के नियम 23 को चुनौती दी गई थी। यह नियम स्वीकृत राजस्व आवश्यकता और अनुमानित राजस्व के बीच के अंतर को नियंत्रित करता है। अदालत ने तमिलनाडु सरकार से जवाब मांगा है कि वह मुफ्त बिजली के वादे को पूरा करने के लिए पैसा कहाँ से लाएगी। साथ ही केंद्र सरकार को भी इस मामले में नोटिस जारी किया गया है।