विकास निधि का पैसा यूपी में खर्च कर दिया
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कथनी और करनी में अंतर साफ
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यहां के विकास का पैसा था वह
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सांसद गुलाम अली खटाना की प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय खबर
श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारतीय जनता पार्टी पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर से राज्यसभा के लिए नामित भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने अपनी निर्वाचन क्षेत्र विकास निधि का एक बड़ा हिस्सा केंद्र शासित प्रदेश के बजाय उत्तर प्रदेश में खर्च किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, खटाना ने अपनी निधि का लगभग 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा यूपी में आवंटित किया है, जो जम्मू-कश्मीर के विकास के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाता है।
उमर अब्दुल्ला ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा नेता कश्मीर की समस्याओं और यहां के विकास की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जब जमीन पर काम करने और फंड आवंटित करने की बात आती है, तो उनकी प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, सांसद महोदय जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व करते हैं, यहीं रहते हैं और यहीं से अपनी आधिकारिक गतिविधियां चलाते हैं, लेकिन विकास का पैसा बाहर के राज्य में भेजा जा रहा है। यह जम्मू-कश्मीर के उन लोगों के साथ अन्याय है जिन्हें स्थानीय बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं के लिए इन कोषों की सख्त आवश्यकता है।
इन आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। खटाना ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सरकारी आवास की कमी और संसदीय कार्यों के संचालन में आने वाली बाधाओं के कारण फंड का उपयोग किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मुख्यमंत्री को आवास आवंटन जैसे तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश नहीं करना चाहिए। हालांकि, फंड को यूपी में खर्च करने के तकनीकी और नैतिक कारणों पर राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है।
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर सरकार और केंद्र के बीच फंड आवंटन और राज्य के दर्जे को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। उमर अब्दुल्ला का यह हमला न केवल भाजपा को स्थानीय स्तर पर घेरने की कोशिश है, बल्कि यह संदेश देने का भी प्रयास है कि केंद्र द्वारा मनोनीत प्रतिनिधि स्थानीय जरूरतों के प्रति गंभीर नहीं हैं। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लपक लिया है और इसे जम्मू-कश्मीर के संसाधनों के बाहरी उपयोग का मुद्दा बना दिया है।