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ब्रिटिश कोर्ट से देश छोड़ने पर रोक है: विजय माल्या

बॉंम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भगोड़े व्यापारी का उत्तर आया

  • भारत में आर्थिक भगोड़ा अपराधी घोषित

  • बैंकों का कर्ज और प्रत्यर्पण की लड़ाई

  • नौ हजार करोड़ की धोखाघड़ी का आरोप

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने बॉम्बे हाई कोर्ट को सूचित किया है कि वह भारत लौटने की कोई निश्चित तारीख तय करने की स्थिति में नहीं हैं। माल्या ने इसके पीछे का मुख्य कारण ब्रिटेन की अदालत द्वारा उन पर लगाए गए प्रतिबंधों को बताया है। माल्या के वकील के माध्यम से कोर्ट को बताया गया कि ब्रिटेन की अदालतों ने उन्हें इंग्लैंड छोड़ने से कानूनी रूप से रोक रखा है, इसलिए उनकी भारत वापसी वर्तमान में उनके नियंत्रण में नहीं है।

यह दलील उस समय आई है जब बॉम्बे हाई कोर्ट माल्या द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। माल्या ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। इस अधिनियम के तहत सरकार को किसी अपराधी की संपत्ति को कुर्क करने का अधिकार मिल जाता है। माल्या का तर्क है कि वह जानबूझकर कानून से नहीं भाग रहे हैं, बल्कि तकनीकी और कानूनी बाधाओं के कारण मजबूर हैं।

ज्ञात हो कि किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व मालिक विजय माल्या पर भारतीय बैंकों का लगभग 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज और धोखाधड़ी का आरोप है। वे मार्च 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे। तब से भारत सरकार उनके प्रत्यर्पण की पुरजोर कोशिश कर रही है। हालांकि ब्रिटेन की अदालतों ने माल्या के प्रत्यर्पण की अनुमति दे दी है, लेकिन वहां चल रही कुछ गुप्त कानूनी प्रक्रियाओं (संभवतः शरण संबंधी) की वजह से उनकी रवानगी रुकी हुई है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने माल्या के इस बयान पर संज्ञान लिया है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल समय काटने की एक रणनीति हो सकती है। प्रवर्तन निदेशालय का स्पष्ट रुख है कि माल्या ने भारतीय न्यायिक प्रक्रिया से बचने के लिए विदेश में शरण ली है। प्रत्यर्पण के इस मामले में अब सबकी निगाहें ब्रिटेन के गृह विभाग और वहां की अदालतों के अंतिम आदेश पर टिकी हैं। यदि माल्या की संपत्ति की कुर्की की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो यह अन्य आर्थिक अपराधियों के लिए भी एक कड़ा संदेश होगा।