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सीरिया से इराक भेजा गया आतंकवादियों को

अमेरिका द्वारा आईएस बंदियों का स्थानांतरण की सूचना

बगदादः बगदाद और वाशिंगटन के बीच हुए एक गुप्त सैन्य समझौते के तहत, मध्य पूर्व की सुरक्षा रणनीति में एक बड़ा और जोखिम भरा बदलाव देखा गया है। अमेरिकी सैन्य कमान ने आज आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि सीरिया के अस्थिर जेल शिविरों से 5,700 से अधिक इस्लामिक स्टेट लड़ाकों को इराक की उच्च-सुरक्षा वाली जेलों में सफलतापूर्वक स्थानांतरित कर दिया गया है।

यह विशाल स्थानांतरण प्रक्रिया पिछले 8 घंटों के भीतर अत्यंत गोपनीयता के साथ पूरी की गई। सुरक्षा कारणों से इस ऑपरेशन के मार्ग और समय को तब तक गुप्त रखा गया जब तक कि अंतिम कैदी को इराकी सीमा के भीतर सुरक्षित नहीं कर लिया गया। अमेरिकी वायु सेना और जमीनी बख्तरबंद दस्तों ने इस काफिले की सुरक्षा सुनिश्चित की, क्योंकि मार्ग में आतंकी हमलों और घात लगाकर किए जाने वाले आक्रमणों का भारी खतरा बना हुआ था।

सीरिया के उत्तर-पूर्वी हिस्से में कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस के नियंत्रण वाले जेल शिविर, विशेषकर अल-होल और अन्य केंद्र, लंबे समय से सुरक्षा के लिए सिरदर्द बने हुए थे। इन शिविरों में स्थिति लगातार बिगड़ रही थी क्योंकि कैदियों के भागने का डर: पिछले कुछ महीनों में जेल तोड़ने की कई कोशिशें हुई थीं। कुर्द बलों के पास इतने बड़े पैमाने पर खूंखार लड़ाकों को लंबे समय तक रखने के लिए पर्याप्त संसाधन और आधुनिक निगरानी तंत्र की कमी थी। इन अस्थिर शिविरों के भीतर आईएस की विचारधारा फिर से पनपने लगी थी, जिसे रोकना लगभग असंभव होता जा रहा था।

अमेरिकी रक्षा विभाग का मानना है कि इराक की नई और आधुनिक उच्च-सुरक्षा जेलें इन बंदियों के लिए अधिक नियंत्रित वातावरण प्रदान करती हैं। इराक के पास इन लड़ाकों पर कानूनी कार्रवाई करने और उन्हें लंबी अवधि तक कैद में रखने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा और अनुभव है।

अमेरिका के अनुसार, यह कदम न केवल सीरिया को अस्थिरता से बचाएगा, बल्कि इन लड़ाकों को फिर से युद्ध के मैदान में उतरने से भी रोकेगा। इराक में इस बड़े स्थानांतरण ने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। इराकी मानवाधिकार समूहों ने इस प्रक्रिया पर चिंता जताई हैं।

इन 5,700 लड़ाकों के खिलाफ चलाए जाने वाले मुकदमों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इराकी जेलों में पहले से ही कैदियों की संख्या अधिक है, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में नए बंदियों का आना वहां की व्यवस्था पर भारी बोझ डाल सकता है। कार्यकर्ताओं की मांग है कि इन बंदियों पर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मुकदमे चलाए जाएं ताकि किसी भी निर्दोष को सजा न मिले और दोषियों को उनके अपराधों के अनुसार दंडित किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थानांतरण वैश्विक आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह दर्शाता है कि अब ध्यान केवल आतंकवादियों को पकड़ने पर नहीं, बल्कि उन्हें दीर्घकालिक कानूनी और भौतिक नियंत्रण में रखने पर केंद्रित है। हालांकि, यह कदम मध्य पूर्व की पहले से ही संवेदनशील राजनीति में एक नया अध्याय भी जोड़ सकता है।