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Delhi NIA Court: लश्कर आतंकी की मदद करने वालों पर बड़ा फैसला, कोर्ट ने सुनाई 15 साल की कड़ी सजा

दिल्ली स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने शुक्रवार को पाकिस्तान सेना समर्थित प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैबा (एलईटी) आतंकवादी संगठन के दो ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) को आरसी-11/2016/एनआईए/डीएलआई के तहत अधिकतम 15 साल की कैद की सजा सुनाई. इन पर आरोप था कि उन्होंने 2016 में कश्मीर में आतंक फैलाने के इरादे से घुसपैठ करने वाले एक भारी हथियारों से लैस पाकिस्तानी आतंकवादी को शरण, भोजन और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की थी.

कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवारा निवासी, दो आरोपियों, जिनकी पहचान जहूर अहमद पीर और नज़ीर अहमद पीर के रूप में हुई है, को यूए (पी) अधिनियम की धारा 18 और धारा 19 के तहत 15-15 साल की कैद और इसी अधिनियम की धारा 39 के तहत नौ साल की अतिरिक्त सजा सुनाई गई है. ये सजाएं साथ-साथ चलेंगी. दोनों पर 200 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है. इनमें से प्रत्येक धारा के तहत 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है, जिससे प्रत्येक आरोपी पर कुल मिलाकर 1,50,000 रुपए का जुर्माना बनता है.

लश्कर-ए-तैयबा की एक बड़ी साजिश

यह केस लश्कर-ए-तैयबा की एक बड़ी साजिश से संबंधित है, जिसके तहत पाकिस्तानी नागरिक और प्रशिक्षित आतंकवादी बहादुर अली उर्फ सैफुल्लाह अन्य आतंकवादियों के साथ जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर गया था. भारी हथियारों से लैस इस आतंकवादी समूह के पास अत्याधुनिक हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक, नेविगेशन उपकरण, नाइट विजन उपकरण और संचार उपकरण थे.

आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने का निर्देश

भारतीय क्षेत्र में रहते हुए, आतंकवादी समूह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान में स्थित अपने लश्कर-ए-तैयबा संचालकों के साथ लगातार संपर्क में था. आतंकवादियों को भारत के भीतर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए लगातार दिशा-निर्देश मिल रहे थे. उन्होंने जम्मू-कश्मीर और दिल्ली सहित भारत के अन्य हिस्सों में सिलसिलेवार आतंकी हमले करने की योजना बनाई थी.

हालांकि, उनकी योजना विफल हो गई क्योंकि बहादुर अली को 25 जुलाई 2016 को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि दो अन्य घुसपैठिए आतंकवादी, अबू साद और अबू दरदा, बाद में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए.

बहादुर अली के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल

जनवरी 2017 में एनआईए ने आरोपी बहादुर अली के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था. अपराध स्वीकार करने के बाद, बहादुर अली को मार्च 2021 में दोषी ठहराया गया और आईपीसी, यूए (पी) अधिनियम, विस्फोटक अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और विदेशी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कठोर कारावास की सजा सुनाई गई.

आश्रय, भोजन और अन्य रसद सहायता प्रदान

आगे की जांच के दौरान ज़हूर अहमद पीर और नज़ीर अहमद पीर की भूमिका सामने आई और एनआईए ने पाया कि उन्होंने पाकिस्तानी आतंकवादी को सुरक्षित आश्रय, भोजन और अन्य रसद सहायता प्रदान की थी. इन दोनों ने कश्मीर घाटी में अन्य पाकिस्तानी आतंकवादियों के साथ बहादुर अली की मुलाकातों की व्यवस्था करके उसकी मदद भी की थी.

2018 में आरोपपत्र दाखिल

इन दोनों व्यक्तियों की पहचान सितंबर 2017 में की गई और उन्हें गिरफ्तार किया गया. एनआईए ने मार्च 2018 में उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया. अदालत ने 18 दिसंबर 2025 को उन्हें दोषी ठहराया और आज उनके खिलाफ सजा सुनाई, जिससे कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकवादियों को पनाह देने वाले ओजीडब्ल्यू नेटवर्क को भारी झटका लगा है.