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भीषण गर्मी, दावानल और जलस्तर में कमी से नया राज खुला

दोनों विश्वयुद्ध के दबे हुए बम उजागर हो गये

लंदनः यूरोप में गर्मियों के दौरान तबाही मचाने वाली भयानक जंगलों की आग ने एक संभावित रूप से घातक नए खतरे को उजागर कर दिया है—वह है प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान के न फटे हुए बम और विस्फोटक सामग्री। हाल के महीनों में महाद्वीप में चिलचिलाती गर्मी और सूखे से जूझ रहे पश्चिमी यूरोप के विशाल भूभाग में आग ने तांडव मचाया है, और इस दौरान दमकलकर्मियों को बमों के फटने के अतिरिक्त खतरे का भी सामना करना पड़ा है। फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम और नीदरलैंड्स में विस्फोटों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

लंदन के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीशियन स्टडीज की शांति और संघर्ष की विद्वान सारा नजेरी ने कहा, जलवायु परिवर्तन अब उन चीजों को बाहर निकालने और उन्हें फिर से सक्रिय करने का काम कर रहा है जो पहले जमीन में दबे होने के कारण स्थिर थे।

दक्षिण-पश्चिम फ्रांस में बोर्डो शहर के पास लगी एक आग ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौर के गोला-बारूद के जखीरे को उजागर किया है। वहीं, पूर्वी बेल्जियम के लिएज प्रांत में स्थानीय गवर्नर हर्वे जामार ने कहा कि आपातकालीन सेवाएं आग लगने वाले क्षेत्र में दबे हुए विस्फोटकों को ध्यान में रखते हुए काम कर रही हैं और हाल ही में कुछ छिटपुट धमाके भी सुने गए हैं।

लिएज के हाई फेंन्स क्षेत्र में विशेष रूप से भयंकर आग देखी गई है, जो सीमा पार करके जर्मनी तक फैली हुई है। द्वितीय विश्व युद्ध के सबसे खूनी संघर्षों में से एक बैटल ऑफ द बुलज इसी हाई फेंन्स और उसके आसपास लड़ी गई थी। 16 दिसंबर 1944 को इस क्षेत्र में जर्मन सेना ने मित्र देशों की सेना के खिलाफ एक बड़ा आक्रमण शुरू किया था। अमेरिकी सैनिकों को अचानक घेरकर उन्होंने शुरुआती सफलता हासिल की थी, लेकिन महीने के अंत तक जैसे ही मित्र देशों की अतिरिक्त सेना पहुंची और जर्मनी के संसाधन खत्म हुए, यह हमला कमजोर पड़ गया।

पूरे यूरोप में सूखे की स्थिति के कारण उस दौर के सैन्य वाहन और हथियार भी बाहर निकल रहे हैं। सिकुड़ती नदियां जर्मन युद्धपोतों, वेहरमाच की मोटरबाइक और बमों को उजागर कर रही हैं। एरिजोना विश्वविद्यालय की शोधकर्ता क्रिस्टीना ग्रीन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण युद्ध की विरासत बार-बार सामने आ रही है। ग्रीन ने आगे कहा, यह युद्ध और संघर्ष की उन विरासतों को दोबारा जीने जैसा है, जिनसे कुछ खास जगहों पर हमें लंबे समय तक निपटना नहीं पड़ा था।