इस अपराध का मुख्य आरोपी अब जाकर गिरफ्तार
सटीक जानकारी पर गिरफ्तार किया गया
उस पर चार लाख का इनाम घोषित था
कर्नल त्रिपाठी सहित कई मारे गये थे
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटीः मणिपुर में 13 नवंबर 2021 को असम राइफल्स के काफिले पर हुए अत्यंत घातक हमले की जांच में एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। सुरक्षा बलों ने इस सनसनीखेज मामले के एक मुख्य आरोपी को धर दबोचा है।
असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस कमांडो ने खुफिया विभाग से मिले सटीक इनपुट और साइबर-ट्रैकिंग के आधार पर एक संयुक्त अभियान चलाकर, गत 22 अगस्त को थौबल जिले के उशोइपोकपी से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के स्वयंभू कैप्टन बालिब उर्फ थियाम बोयचा सिंह को गिरफ्तार कर लिया। इस कुख्यात मिलिटेंट को एक हाई-वैलू टारगेट के रूप में चिन्हित किया गया था, जिसकी तलाश राष्ट्रीय जांच एजेंसी लंबे समय से कर रही थी और उस पर 4 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, पकड़ा गया आरोपी बालिब उस ऐतिहासिक और घातक हमले में सीधे तौर पर शामिल था, जिसमें कर्नल विप्लव त्रिपाठी, उनके परिवार के सदस्यों समेत असम राइफल्स के चार जवान शहीद हो गए थे। यह पूरा ऑपरेशन ईस्टर्न कमांड के तहत स्पियर कॉर्प्स की असम राइफल्स यूनिट और मणिपुर पुलिस के आपसी समन्वय से अंजाम दिया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए लिलोंग पुलिस स्टेशन में मणिपुर पुलिस को सौंप दिया गया है।
क्या था 2021 का वह घातक हमला? 13 नवंबर 2021 को भारत-म्यांमार सीमा के पास चूड़ाचंद्रापुर जिले के सिंगहाट उप-मंडल के सेहकेन गांव के नजदीक यह हमला हुआ था। 46 असम राइफल्स की खुगा बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल विप्लव त्रिपाठी अपने परिवार और सुरक्षाकर्मियों के साथ यात्रा कर रहे थे, तभी घात लगाए आतंकवादियों ने उनके काफिले को निशाना बनाया।
आतंकवादियों ने पहले एक शक्तिशाली इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस का धमाका किया और उसके बाद जंगलों से ताबड़तोड़ भारी गोलीबारी शुरू कर दी। इस जघन्य हमले में कर्नल त्रिपाठी, उनकी पत्नी अनुजा और उनके छह साल के बेटे आबीर की मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा क्विक रिएक्शन टीम के चार जवान—राइफलमैन सुमन स्वर्गियारी, खतनेइ कोन्याक, आर.पी. मीना और श्यामल दास भी वीरगति को प्राप्त हुए, जबकि छह अन्य सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
इस घटना की जिम्मेदारी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और मणिपुर नागा पीपुल्स फ्रंट ने संयुक्त रूप से ली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में इसकी जांच एनआईए को सौंप दी गई थी। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि बालिब की गिरफ्तारी से इस पूरे षड्यंत्र और आतंकवादियों के लॉजिस्टिक नेटवर्क की परतों को खोलने में काफी मदद मिलेगी।