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चीन ने वाशिंगटन के दावों को झूठा बताया

अमेरिका द्वारा परमाणु परीक्षण के आरोप पर जवाब आया

बीजिंग: चीन और अमेरिका के बीच पहले से ही जारी व्यापारिक और तकनीकी युद्ध अब परमाणु हथियारों की निगरानी के संवेदनशील मुद्दे तक पहुँच गया है। बीजिंग ने आज आधिकारिक तौर पर उन अमेरिकी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि चीन ने अपनी पश्चिमी मरुभूमि में गुप्त रूप से कम क्षमता वाले परमाणु परीक्षण किए हैं। इस बयानबाजी ने दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव को एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुँचा दिया है।

विवाद की जड़ वाशिंगटन द्वारा जारी एक हालिया खुफिया रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में उपग्रह से प्राप्त चित्रों और डेटा का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि चीन के लोप नूर परीक्षण स्थल पर असामान्य हलचल देखी गई है। अमेरिकी विशेषज्ञों का तर्क है कि इस तरह की गतिविधियाँ व्यापक परमाणु परीक्षण निषेध संधि के तहत निर्धारित जीरो यील्ड मानक का उल्लंघन हो सकती हैं। अमेरिका का मानना है कि चीन अपनी परमाणु क्षमता को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने के लिए इन गुप्त परीक्षणों का सहारा ले रहा है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इन आरोपों को निराधार और दुर्भावनापूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका जानबूझकर वैश्विक जनमत को गुमराह कर रहा है ताकि वह अपनी सैन्य विस्तारवादी नीतियों को उचित ठहरा सके। चीन ने तर्क दिया कि वह अपनी राष्ट्रीय रक्षा क्षमताओं को आधुनिक जरूर बना रहा है, लेकिन उसने कभी भी किसी अंतरराष्ट्रीय संधि का उल्लंघन नहीं किया है। प्रवक्ता ने यह भी दोहराया कि चीन हमेशा से पहले परमाणु हमला न करने की नीति पर कायम रहा है।

अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल तकनीकी उल्लंघन तक सीमित नहीं है। यह दोनों देशों के बीच अविश्वास की गहरी खाई को दर्शाता है। यदि यह आरोप-प्रत्यारोप जारी रहता है, तो इससे दक्षिण चीन सागर और ताइवान जैसे मुद्दों पर पहले से जारी तनाव और अधिक भड़क सकता है। सबसे बड़ी चिंता वैश्विक स्तर पर हथियारों की एक नई होड़ शुरू होने की है। यदि दुनिया की दो सबसे बड़ी सैन्य शक्तियाँ परमाणु निगरानी संधियों पर सहमत नहीं होती हैं, तो इससे वैश्विक निरस्त्रीकरण के दशकों पुराने प्रयासों को भारी धक्का लग सकता है।