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सूडान की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की गंभीर रिपोर्ट

हिंसा के बीच फंसे हैं पचास हजार लोग

दारफुर: संयुक्त राष्ट्र ने सूडान के पश्चिमी क्षेत्र दारफुर पर एक दिल दहला देने वाली रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, दारफुर एक बार फिर ‘मानवीय नरसंहार’ की कगार पर खड़ा है। चल रहे गृहयुद्ध और पुनर्जीवित हुई जातीय हिंसा के कारण पिछले मात्र सात दिनों के भीतर 50,000 से अधिक लोग बेघर होकर पलायन करने पर मजबूर हुए हैं।

इस विस्थापन का सबसे दुखद पहलू यह है कि पलायन करने वालों में अधिकांश संख्या महिलाओं और बच्चों की है। ये लोग चिलचिलाती धूप में सैकड़ों मील की पैदल यात्रा कर पड़ोसी देशों (जैसे चाड और दक्षिण सूडान) की सीमाओं पर शरण मांग रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों में संसाधनों की भारी कमी के कारण ये शरणार्थी बिना पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पानी और चिकित्सा सहायता के खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

यूएन ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि संघर्षरत गुटों द्वारा जानबूझकर सहायता संगठनों का रास्ता रोका जा रहा है। मानवीय गलियारों के बाधित होने से दारफुर के आंतरिक हिस्सों में भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। बुनियादी ढांचे की स्थिति यह है कि लगभग सभी स्कूल या तो ध्वस्त हो चुके हैं या उन्हें सैन्य शिविरों में बदल दिया गया है। क्षेत्र के 80 फीसद से अधिक अस्पताल काम करना बंद कर चुके हैं, जिससे सामान्य बीमारियां भी जानलेवा बन रही हैं। सामूहिक हिंसा, जातीय संहार और व्यापक लूटपाट की खबरों ने मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ा दी हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने इस त्रासदी से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 2 बिलियन डॉलर की तत्काल मानवीय सहायता की अपील की है। हालांकि, रिपोर्ट में अफसोस जताया गया है कि वैश्विक स्तर पर अब तक इस मांग का केवल एक बहुत छोटा हिस्सा ही प्राप्त हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वित्तीय सहायता में देरी हुई, तो सूडान का यह संकट केवल एक गृहयुद्ध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे पूर्वी अफ्रीका (हॉर्न ऑफ अफ्रीका) की सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता के लिए डोमिनो इफेक्ट साबित हो सकता है।

हालात की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस उच्च स्तरीय चर्चा का मुख्य एजेंडा तत्काल पूर्ण संघर्ष विराम लागू करना और सुरक्षित मानवीय गलियारे बनाना है ताकि फंसे हुए नागरिकों तक भोजन और दवाएं पहुँचाई जा सकें।