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काउंसिल ने नये प्रधानमंत्री को सत्ता सौंप दी

अपराध और निरंतर हिंसा से पीड़ित हाइती में नई उम्मीद

पोर्ट ओ प्रिंसः कैरिबियाई राष्ट्र हाइती के लिए आज की सुबह एक नई उम्मीद और भारी चुनौतियों का संगम लेकर आई है। पिछले कई वर्षों से भयानक गैंगवार, अराजकता और राजनीतिक शून्य की स्थिति से जूझ रहे इस देश में आज तड़के एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव हुआ। हाइती की ट्रांजिशनल काउंसिल (संक्रमणकालीन परिषद) ने आधिकारिक रूप से नए प्रधानमंत्री को देश की बागडोर सौंप दी है।

यह हस्तांतरण किसी भव्य समारोह के बजाय बहुत ही गुप्त और अभेद्य सुरक्षा घेरे के बीच आयोजित किया गया। इसकी मुख्य वजह यह है कि राजधानी पोर्ट-ओ-प्रिंस का लगभग 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आज भी हिंसक आपराधिक गिरोहों के नियंत्रण में है, जो किसी भी सरकारी प्रक्रिया को बाधित करने की ताकत रखते हैं।

नवनियुक्त प्रधानमंत्री के कंधों पर कांटों भरा ताज है। उनके सामने सबसे पहली और अनिवार्य चुनौती देश में बुनियादी कानून-व्यवस्था और शांति बहाल करना है। हाइती इस समय उस मुहाने पर खड़ा है जहाँ से आगे का रास्ता या तो लोकतंत्र की बहाली की ओर जाता है या पूर्ण विनाश की ओर।

नए नेतृत्व का प्राथमिक लक्ष्य एक ऐसा सुरक्षित वातावरण तैयार करना है जिसमें निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकें, क्योंकि लंबे समय से देश में कोई निर्वाचित सरकार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने इस नई नियुक्ति का पुरजोर समर्थन किया है और देश को मानवीय व सुरक्षा सहायता देने का वादा दोहराया है।

हाइती की आम जनता इस समय अकल्पनीय मानवीय संकट के दौर से गुजर रही है। भुखमरी अपनी चरम सीमा पर है और स्वास्थ्य सेवाएँ पूरी तरह चरमरा चुकी हैं। गिरोहों द्वारा सड़कों और बंदरगाहों की नाकेबंदी के कारण रसद और दवाओं की आपूर्ति ठप है। ऐसे में नए प्रधानमंत्री के पास केन्या के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता मिशन के साथ समन्वय करने की भारी जिम्मेदारी है। इस विदेशी बल के साथ मिलकर उन्हें उन इलाकों को वापस जीतना होगा जहाँ अब गिरोहों का समानांतर शासन चलता है।

दुनिया भर के कूटनीतिज्ञ और सुरक्षा विशेषज्ञ इस घटनाक्रम पर पैनी नजर गड़ाए हुए हैं। सवाल केवल एक नई सरकार के गठन का नहीं है, बल्कि उस सरकार की प्रासंगिकता और शक्ति का है। क्या यह नया प्रशासनिक नेतृत्व वास्तव में जमीन पर गिरोहों के आतंक को खत्म कर पाएगा? क्या केन्याई पुलिस और स्थानीय बल मिलकर राजधानी की सड़कों को सुरक्षित कर पाएंगे? इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि हाइती गृहयुद्ध की आग से बाहर निकल पाएगा या नहीं। यह बदलाव हाइती के इतिहास का एक निर्णायक अध्याय है, जो या तो पुनर्निर्माण की नींव रखेगा या संघर्ष को और गहरा कर देगा।