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बिहार चुनाव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

प्रशांत किशोर की जनसुराज ने बिहार में नये चुनाव की मांग की

  • आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन

  • चुनाव आयोग ने इसकी अनदेखी की

  • कानून के तहत इसकी इजाजत नहीं है

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: पूर्व चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। पार्टी ने दायर याचिका में राज्य में पिछले साल हुए चुनावों को रद्द कर नए सिरे से मतदान कराने की मांग की है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार (6 फरवरी, 2026) को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष होने की संभावना है।

हाल ही में हुए इन चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता बरकरार रखी है, जिसने 243 में से 202 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, विपक्षी इंडिया गठबंधन को केवल 35 सीटें मिलीं। इस चुनाव में जन सुराज पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और वह अपना खाता खोलने में भी विफल रही, साथ ही उसके अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हो गई।

जन सुराज पार्टी ने बिहार सरकार पर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है। याचिका के अनुसार चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत लगभग 25-35 लाख महिला मतदाताओं के बैंक खातों में 10,000-10,000 रुपये सीधे ट्रांसफर किए गए। याचिका में तर्क दिया गया है कि आचार संहिता लागू होने के बाद किया गया यह भुगतान भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है और यह मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश थी।

पार्टी ने चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की है कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत इस सीधे धन हस्तांतरण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का उद्देश्य राज्य में महिलाओं को छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए 10,000 रुपये का प्रारंभिक अनुदान देकर स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। हालांकि, जन सुराज का दावा है कि चुनाव से ठीक पहले इस योजना का क्रियान्वयन चुनावी निष्पक्षता के खिलाफ था।