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युमनाम खेमचंद सिंह नये सीएम चुने गये

मणिपुर में जमीनी स्तर पर तनाव और संघर्ष का माहौल

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः मणिपुर में जारी जातीय हिंसा और लंबे समय से लागू राष्ट्रपति शासन के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। मंगलवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और आरएसएस के स्वयंसेवक युमनाम खेमचंद सिंह (62) को सर्वसम्मति से भाजपा विधायक दल का नेता चुन लिया गया।

यह निर्णय पूर्वोत्तर के इस अशांत राज्य में लोकतांत्रिक सरकार की बहाली की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। खेमचंद की नियुक्ति ऐसे संवेदनशील समय में हुई है जब मणिपुर में फरवरी में केंद्रीय शासन (राष्ट्रपति शासन) का एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। ज्ञात हो कि 3 मई 2023 को मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच भड़की हिंसा में अब तक 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 60,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। भाजपा संसदीय बोर्ड द्वारा नियुक्त केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुघ की उपस्थिति में इस चयन प्रक्रिया को पूरा किया गया। मणिपुर भाजपा ने सोशल मीडिया पर खेमचंद को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि उनके अनुभव से जनता की आकांक्षाएं पूरी होंगी।

युमनाम खेमचंद सिंह को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जिनकी स्वीकार्यता मैतेई और कुकी-ज़ो, दोनों समुदायों में बनी हुई है। दिसंबर 2025 में, वह संघर्ष शुरू होने के बाद कुकी गांवों का दौरा करने वाले पहले मैतेई विधायक बने थे। उनकी छवि एक ऐसे नेता की है जो हिंसा की सार्वजनिक रूप से निंदा करते आए हैं। 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 37 विधायक हैं, जिनमें 7 कुकी-ज़ो विधायक भी शामिल हैं। हालांकि, मंगलवार की बैठक में कुछ कुकी विधायकों ने इस निर्णय पर असंतोष जताते हुए खुद को छला हुआ महसूस करने की बात कही है।

राजनीति में आने से पहले खेमचंद एक प्रतिष्ठित ताइक्वांडो खिलाड़ी और प्रशिक्षक रहे हैं। हाल ही में उन्हें 5वीं डैन ब्लैक बेल्ट मिली है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 2002 में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के साथ की थी। 2013 में भाजपा में शामिल होने के बाद, वे 2017 में पहली बार सिंगजामेई निर्वाचन क्षेत्र से विधायक बने और विधानसभा अध्यक्ष के रूप में भी सेवाएं दीं। खेमचंद के सामने सबसे बड़ी चुनौती समुदायों के बीच व्याप्त ‘विश्वास की कमी’ को दूर करना है। कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी जैसे संगठनों ने पहले समाधान और फिर सरकार के गठन की बात कहकर इस राजनीतिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।